बागेश्वर में आपसी मनमुटाव के कारण छह साल से अलग रह रहे पति-पत्नी शनिवार को एक हो गए। उनके मासूम बच्चों के चेहरे पर भी खुशी देखी गई। यह सब जिला जज डॉ. जीके शर्मा की काउंसलिंग के कारण संभव हो सका।
अदालत में चल रहा था विवाह विच्छेद संबंधी वाद
विवाह विच्छेद संबंधी यह वाद कपकोट के कर्मी निवासी नरेंद्र सिंह कोरंगा और उनकी पत्नी राधा देवी के मध्य चल रहा था। बीती सात जुलाई को नरेंद्र सिंह ने तलाक का दावा पेश किया था। यह मामला जिला जज की अदालत में चल रहा था, जिसमें भरण पोषण का भी मामला शामिल था।
जिला न्यायालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार 15 साल पहले दोनों का विवाह हुआ, उनके तीन बच्चे हैं। बाद में पति-पत्नी के बीच मतभेद इतने बढ़ गए कि दोनों अलग-अलग रहने लगे। 6 साल से यह सिलसिला चल रहा था।
बड़े पुत्र को बनाया दोनों के बीच की कड़ी
बच्चे मां के पास रह रहे थे, लेकिन मां-पिता के बीच तलाक की नौबत आने से मासूम बच्चों का भविष्य भी प्रभावित हो रहा था। शनिवार को लोक अदालत में जिला जज डॉ. जीके शर्मा ने पहले पति-पत्नी से अलग-अलग बातें की। उनके बड़े पुत्र को दोनों के बीच कड़ी के रूप में तैयार करके तीनों को एक साथ बुलाया।
जिला जज ने पति पत्नी के मधुर, पवित्र वैवाहित संबंधों के साथ ही बच्चों के प्रति साझा जिम्मेदारी का अहसास कराकर दोनों को फिर से वैवाहिक परंपरा के अनुसार साथ रहने को राजी कर लिया। दोनों के चेहरों पर मुस्कान थी।
जिला जज सहित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चंद्रमणी राय, सिविज जज जूनियर डिवीजन नेहा कुशवाहा और वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पति पत्नी और उनके साथ आए बड़े पुत्र का शुभ कामनाएं देकर घर को भेजा। जिला जज ने बताया कि पति पत्नी के संबंधों को मधुर बनाने के लिए आवश्यकता पड़ी तो फिर से काउंसलिंग की जाएगी।