देश के जानेमाने पत्रकार और लेखक विनोद मेहता के निधन से मसूरी के लेखकों में शोक की लहर है। पद्मश्री रस्किन बांड और प्रो. गणेश शैली ने उनकी मौत को पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
वरिष्ठ पत्रकार विनोद मेहता का मसूरी से पुराना रिश्ता रहा है। झड़ीपानी स्थित कमल कॉटेज में उनका बंगला है, जिसमें वे गर्मी की छुट्टियां बिताने आते थे। प्रो. गणेश शैली ने बताया कि विनोद जब भी मसूरी आते थे तो रस्किन और उनके यहां जरूर आते थे। मेहता की ‘लखनऊ ब्वाय’ पुस्तक खासी चर्चित रही।
विनोद मेहता वर्ष 1976 में पहली बार मसूरी आए थे। उस दौरान उन्होंने वाइनवर्ग ऐलन के पास स्थित मेपलवुड कॉटेज में रस्किन बांड से मुलाकात की थी। उसी दौरान प्रो. गणेश शैली की भी उनसे पहली मुलाकात हुई थी। वर्ष 2003 में भी विनोद मसूरी आए थे।
उस वक्त क्लिफ हॉल इस्टेट में उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार सुधीर थपलियाल के घर में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया था। विनोद मेहता मसूरी वुडस्टॉक में आयोजित विंटरलाइन राइटर फेस्टिवल में हिस्सा लेने भी आए थे। मसूरी में वे लगातार लेखकों और पत्रकारों से मिलते रहते थे। पायनियर के संपादक रहते भी विनोद मेहता कई बार मसूरी आए।