शासन को नहीं जमी संस्थान की पहली रिपोर्ट
संस्थान को यह रिपोर्ट देनी थी बाईपास निर्माण का काम शुरू करने पर ऊपर जोशीमठ में भूधंसाव प्रभावित क्षेत्र में कोई असर तो नहीं पड़ेगा। रिपोर्ट मिली भी, लेकिन शासन को नहीं जमी। दरअसल, रिपोर्ट में यह कहा गया कि जोशीमठ में भूधंसाव का बाईपास निर्माण पर कोई असर नहीं पड़ेगा। शासन ने संस्थान से दोबारा रिपोर्ट देने के संबंध में पत्र लिखा। यह रिपोर्ट संस्थान को 15 मार्च तक मिल जानी चाहिए थी। सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत सिन्हा के मुताबिक, अभी शासन को रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।
रिपोर्ट पक्ष में हुई तत्काल शुरू होगा काम
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि आईआईटी रुड़की की सर्वे रिपोर्ट में पक्ष में हुई तो जिलाधिकारी को बाइपास का काम शुरू करने के लिए कहा जाएगा।
इसलिए जरूरी है यह बाईपास
बदरीनाथ हाईवे पर यदि हेलंग-बाईपास का निर्माण होता है तो यह चीन सीमा क्षेत्र में सेना की आवाजाही के साथ ही चारधाम यात्रा, हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी जाने वाले तीर्थयात्रियों व पर्यटकों के लिए सुगम हो जाएगा। इस बाईपास के निर्माण से बदरीनाथ धाम तक आने-जाने में तीर्थयात्रियों की 28 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। साथ ही पांडुकेश्वर, गोविंदघाट और माणा गांव के ग्रामीणों को भी अपने गंतव्य तक जाने के लिए लंबी दूरी की आवाजाही नहीं करनी पड़ेगी। जबकि औली, नृसिंह मंदिर और नीती घाटी जाने वाले तीर्थयात्रियों व पर्यटकों को जोशीमठ नगर से जाना होगा।
34 साल से चल रही कवायद
चीन सीमा क्षेत्र को देखते हुए वर्ष 1988-89 में यूपी सरकार ने सिंचाई विभाग को हेलंग-मारवाड़ी बाईपास निर्माण की स्वीकृति दी थी। तब सड़क कटिंग का काम बीआरओ ने शुरू किया था लेकिन स्थानीय लोगों ने बाईपास का विरोध शुरू कर दिया। तर्क जोशीमठ में पर्यटन व तीर्थाटन गतिविधियों पर नकारात्मक असर का दिया गया था। वर्ष 1991 में स्थानीय लोगों ने इस मामले में उच्च न्यायालय इलाहबाद की शरण ली। कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। ऑलवेदर रोड परियोजना कार्य के तहत 2021 में केंद्र सरकार ने फिर से हेलंग बाईपास के निर्माण को अपनी स्वीकृति दी लेकिन अब जोशीमठ भू-धंसाव होने के कारण इसका निर्माण फिर से रुक गया है।
रुड़की आईआईटी को रिपोर्ट देने के लिए पत्र लिखा गया था। अभी शासन को रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।
- आनंद श्रीवास्तव, अपर सचिव (आपदा प्रबंधन)