इतना पानी निकलेगा तो भू-धंसाव की समस्या सामने आएगी
भवनों के सीवर और पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं है। यह नगर पालिका के दायित्व थे जो पूरे नहीं किए गए। अनुमान के मुताबिक यह प्रत्येक घर से लगभग 200 लीटर पानी निकलता है। यदि लगभग एक हजार घरों से प्रत्येक दिन इतना पानी निकलेगा तो भू-धंसाव की समस्या सामने आएगी। इसके अलावा पहाड़ में किसी भी सुरंग या सड़क निर्माण से पूर्व गंभीर अध्ययन होना चाहिए। इसमें स्थानीय लोगों और स्थानीय संस्थानों के अनुभव और राय जरूरी ली चाहिए।
50 सालों में आए बदलाव का हो रहा अध्ययन
श्रीनगर टीम वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देख रही है कि पिछले 50 सालों में जोशीमठ शहर मेें क्या और किस प्रकार बदलाव आया है। इस दौरान हुए भू-धंसाव, भूस्खलन सहित अन्य घटनाओं का विश्लेषण किया जाएगा जबकि सामाजिक सर्वेक्षण में निर्माण कार्यों का अध्ययन किया जा रहा है। यह भी देखा जा रहा है कि इस समयावधि में भवनों की कितनी संख्या बढ़ी है।
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सेटेलाइट चित्रों का करेंगे धरातल पर सत्यापन
जोशीमठ में भू-धंसाव के लिए जिम्मेदार कारकों को ढूंढने के लिए रिमोट सेसिंग से उपलब्ध सेटेलाइट चित्रों का विश्लेषण किया जा रहा है। प्रो. पंवार ने बताया कि सेटेलाइट से उपलब्ध चित्रों का मौके पर जाकर सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद पूरी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपी जाएगी।