जोशीमठ में 11 भूकंप स्टेशन स्थापित किए गए
रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि यहां नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत अपशिष्ठ जल शोधन संयंत्र लगाया गया है, लेकिन घरों, होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले पानी को इससे नहीं जोड़ा गया है। संस्थान की ओर से भूधंसाव के कारणों के साथ ही जोशीमठ टाउनशिप प्लानिंग के लिडार मैपिंग के माध्यम से 10 सेमी. परिधि का कंटूर मैप तैयार किया गया है। इसके अलावा जोशीमठ में 11 भूकंप स्टेशन स्थापित किए गए हैं।
एनजीआरआई ने धारण क्षमता और पानी की निकासी को माना कारण
नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनजीआरआई) हैदराबाद को अध्ययन में जोशीमठ में 20 से 50 मीटर गहराई तक में भूधंसाव के प्रमाण मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार वहां सतह पर जो स्थिति नजर आ रही है, कई स्थानों पर 50 मीटर गहराई तक के भूभाग तक पाई गई है। रिपोर्ट में नगर की धारण क्षमता से अधिक भवनों का निर्माण, पानी की निकासी नहीं होना, जंगलों का कटाव, प्राकृतिक जल स्रोतों के रास्तों में रूकावट, भवनों का विस्तार जैसे प्रमुख कारण भूधंसाव के लिए अंकित किए गए हैं।
रिपोर्ट में एनटीपीसी की परियोजना को 'क्लीन चिट'
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) और राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआईएच) ने जोशीमठ में अध्ययन के बाद अपनी रिपोर्ट में चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर एनटीपीसी की 520 मेगावाट विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना को ''क्लीन चिट' दी है। गत पांच जनवरी को स्थानीय निवासियों के विरोध के बाद राज्य सरकार ने एनटीपीसी परियोजना स्थल पर सभी काम रोक दिए थे।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जोशीमठ में जेपी कॉलोनी में पानी के तेज बहाव का परियोजना से कोई संबंध नहीं है। रिपोर्ट में पानी के नमूनों के वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद दावा किया गया है कि जेपी कॉलोनी में पानी का रिसाव ऊपरी इलाके से संबंध रखता है।
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एनटीपीसी की साइट से लिए गए पानी के नमूने जेपी कॉलोनी में निकलने वाले पानी के नमूनों से मेल नहीं खाते हैं। एनआईएच की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसी संभावना हो सकती है कि किसी उप-सतह चैनल के अवरोध के कारण जमीन के भीतर पानी का अस्थायी भंडारण बन गया हो, जो अंततः फट गया। हालांकि अभी रिपोर्ट का व्यापक स्तर पर अध्ययन किया जा रहा है।