जोशीमठ भू-धंसाव पर अलग-अलग सर्वे कर रही केंद्रीय संस्थानों की रिपोर्टों के आधार पर एक माह में हाइड्रोलॉजिकल मैपिंग की अंतिम रिपोर्ट आएगी। चार संस्थानों के वरिष्ठ वैज्ञानिकों की टीम पानी का रिसाव और भूमिगत जल का सर्वे कर रही है।
सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत सिन्हा ने बताया कि राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्था (एनआईएच) और भू-जल संस्थान के वैज्ञानिक के माध्यम से पानी के रिसाव की जांच की जा रही है। जबकि एनजीआरआई और वाडिया भू-विज्ञान संस्थान की टीम रेस्टीवेटेड टेस्ट कर रहे हैं। जिसमें आधुनिक तकनीक से जमीन के अंदर करंट भेजा जाता है। यदि जमीन के अंदर पानी होगा तो विद्युतीय क्षमता बढ़ जाएगी। पत्थर होने पर विद्युत क्षमता कम होगी।
एनजीआरआई हैदराबाद की टीम अगले सात दिन तक पानी का सैंपल लेगी। एक दिन में टीम की ओर से एक से दो सैंपल ही सकती है। चारों टीमों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट का परीक्षण व मिलान करने के बाद ही वाटर स्प्रिंग और हाइड्रोलॉजिकल मैप तैयार किया जाएगा।