प्रश्न- वह डीपीआर आज तक नहीं बनी?
-इस बीच हालात बिगड़ गए। डीपीआर आज कल में आ जाएगी।
प्रश्न: मिश्रा रिपोर्ट की चेतावनी तो 1976 में आ गई थी। एक्शन में तो बहुत पहले आ जाना चाहिए था?
- बिल्कुल सही है यह कार्रवाई बहुत पहले शुरू हो जानी चाहिए थी। उपचार किया जाना चाहिए था, लेकिन पहले की मैं नहीं जानता। जब यह बात मेरे संज्ञान में आई, हम तुरंत आगे बढ़े। दस दिन के भीतर जोशीमठ को सुरक्षा के घेरे में ले लिया गया। आप देख रहे हैं। हर स्तर पर सरकार ने तेजी दिखाई है।
प्रश्न: अब तक आई हर रिपोर्ट में कहा गया है कि जोशीमठ की जमीन अब सुरक्षित नहीं है, फिर बार-बार पुर्निर्माण की बात क्यों हो रही है? हम विस्थापन या पुनर्वास की बात क्यों नहीं कर रहे हैं?
-दोनों बातों पर हमारा ध्यान है। हम जोशीमठ को उसके हालात पर भी नहीं छोड़ सकते। लोगों को विस्थापन करने के बाद जोशीमठ को बचाने के लिए जो भी कार्रवाई करनी पड़े, हम करेंगे। जोशीमठ का अपना एक धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है, उसे ऐसे ही उसके हाल पर नहीं छोड़ सकते। अगर हमने जोशीमठ को ऐसे ही छोड़ दिया तो पूरे देश में एक गलत संदेश जाएगा।
प्रश्न- ज्योतिर्मठ और मठागंण (शंकराचार्य गद्दी स्थल) में भी दरारें हैं, क्या मठ को भी विस्थापित किया जाएगा?
- जी हां, मठों में भी दरारें आई हैं। जरूरत पड़ी तो उन्हें भी शिफ्ट किया जाएगा। दरारों पर नजर रखी जा रही है। यदि उनमें वृद्धि होती है और रहने के लिहाज से असुरक्षित लगे तो निश्चित तौर पर उन्हें भी शिफ्ट किया जाएगा। इसमें कोई संशय नहीं है।
प्रश्न: औली-जोशमठ रोपवे क्षेत्र में भी दरारें हैं, रापवे नहीं चलेगा तो विंटर गेम्स कैसे होंगे? पर्यटन पर इसका क्या असर पड़ेगा
- यह बात सही है कि रोपवे क्षेत्र में बड़ी दरारें आई हैं। रोपवे प्लेटफार्म में भी दरारें आई हैं। जब तक तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट नहीं मिल जाती, तब तक आपदा प्रबंधन विभाग रोपवे को चलाने की अनुमति नहीं दे सकता है। विंटर गेम्स होंगे या नहीं इस बारे में पर्यटन विभाग ही बेहतर बता पाएगा।
प्रश्न: बदरीनाथ हाईवे पर भी दरारें आई हैं। यह सामरिक महत्व की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण सड़क है। हाईवे के पूरा धंसने की स्थिति में सरकार के पास क्या विकल्प है?
- बदरीनाथ यात्रा सिर्फ उत्तरखंड नहीं पूरे देश का भी विषय है। इस संबंध में मुख्यमंत्री का साफ आदेश है कि यात्रा नहीं रुकेगी। वैज्ञानिकों संस्थाओं की रिपोर्ट का इंतजार है। यात्रा जरूर होगी। कोई न कोई राह जरूर निकलेगी।
प्रश्नः जोशीमठ में भू-धंसाव से बनी बरारों को मलबे से पाटा जा रहा है, क्या यह वैज्ञानिक रूप से सही है? क्या यह पैसे की फिजूलखर्ची नहीं है?
- मलबे से नहीं बेंटोनाइट तकनीकी से भरा जा रहा है, जिसमें एक विशेष प्रकार की क्ले को मिट्टी के साथ भरा जाता है। हम जानते हैं यह स्थायी उपचार नहीं है, लेकिन बारिश के पानी को जमीन में जाने से बचाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। पानी के जमीन में जाने से ज्यादा दिक्कत हो सकती है।
प्रश्न: पुनर्वास के प्रश्न पर क्या प्रगति है? क्या कोई जगह अब तक पक्के तौर पर फाइनल हो पाई है?
- मोटे तौर पर चार स्थानों को विस्थापन के लिए चिह्नित किया गया था। पीपलकोटी में अच्छी जमीन थी, लेकिन वहां कुछ व्यवहारिक दिक्कतें सामने आ रही हैं। फिलहाल पीपलकोटी को होल्ड पर रखा गया है। उद्यान विभाग और ढाक की जमीन दोनों जगह उपयुक्त पाई गई हैं।लोगों को राहत पैकेज के साथ उनकी सुरक्षित जमीन पर मकान बनाकर भी दे सकते हैं, लोगों के सामने विकल्प रखे जाएंगे।
प्रश्न: तकनीकी संस्थानों की रिपोर्ट के बाद की क्या प्लानिंग है?
- हम कोई भी फैसला हड़बड़ी या जल्दबाजी में नहीं करना चाहते हैं। जोशीमठ पर पहले भी अध्ययन हुए हैं, लेकिन वह सब बाहरी तौर पर जो आंखों ने देखा, उसके आधार पर थे। पहली बार वैज्ञानिक तौर पर नई तकनीक के उपकरणों के साथ अध्ययन किए जा रहे हैं। इसलिए हम बार-बार कह रहे हैं, तकनीकी संस्थानों की रिपोर्ट मिलने के बाद नीतिगत फैसले लिए जाएंगे। ताकि भविष्य में कोई और दिक्कत न हो।
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प्रश्नः जोशीमठ के प्रभावित लोग सरकार पर कितना भरोसा करें?
उत्तरः शतप्रतिशत, मैं बहुत जिम्मेदारी से यह बात कहना चाहता हूं कि जोशीमठ के लोगों का किसी भी स्तर पर अहित नहीं होने दिया जाएगा।