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मुख्य सचिव के आदेश पर नियम ताक पर रख नियुक्तियां

Fri, 03 Feb 2017 12:22 PM IST
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
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टीचर - फोटो : Amar Ujala
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चुनाव आचार संहिता से पहले मुख्य सचिव एस रामास्वामी के आदेश पर उच्च शिक्षा विभाग में स्थायी और संविदा पर की गई दो नियुक्तियां सवालों के घेरे में है। इन नियुक्तियों के प्रस्ताव पर अनुभाग ने यह कहते हुए आपत्तियां लगाई थीं कि ये नियम विरुद्ध हैं और बगैर किसी नियम व नियमावली के इन नियुक्तियों को नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद मुख्य सचिव ने आपत्तियों को दरकिनार कर नियुक्तियों के आदेश कर दिए। उच्च शिक्षा विभाग विभाग में हुई इन नियुक्तियों से हाल के कुछ महीनों में हुई अन्य नियुक्तियों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
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संविदा कार्मिक की आश्रित को स्थायी नियुक्ति
सरकारी सेवकों के आश्रितों की भर्ती नियमावली 1974 एवं इसमें समय-समय पर किए गए संशोधन से संबंधित आदेशों में अनुकंपा के आधार पर नियुक्तियां केवल सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों के लिए है। संविदा पर कार्यरत कर्मचारी के आश्रिताें को नियुक्ति नहीं दी जा सकती, लेकिन राजकीय महाविद्यालय बेरीनाग पिथौरागढ़ में एक महिला को गेस्ट फैकल्टी व संविदा पर कार्यरत कार्मिक की मृत्यु पर आश्रित के रूप में स्थायी नियुक्ति दे दी गई है। महिला की नियुक्ति के प्रस्ताव पर 24 अक्तूबर 2016 को शासन की नोटशीट पर स्पष्ट रूप से यह लिखा गया कि इसके लिए कोई प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद 21 नवंबर 2016 को मुख्य सचिव एस रामास्वामी ने महिला की नियुक्ति के आदेश कर दिए।

अनुशासनहीनता पर भी संविदा पर मिली तैनाती
राजकीय विधि महाविद्यालय गोपेश्वर में संविदा प्रवक्ता के पद को लेकर भी शासन के अनुभाग की ओर से आपत्तियां लगाई र्गइं। संविदा प्रवक्ता केदार सिंह पलडिया की नियुक्ति के मामले में शासन की नोटशीट में यह कहा गया कि नौ शिक्षा सत्रों में उन्होंने मात्र 57 दिन कार्य पर उपस्थिति दी। यह अनुशासनहीनता एवं संविदा शर्तों के विरुद्ध है। यह भी कहा गया कि उन्हें पद पर उपस्थित होने के लिए पूर्व में ही अवसर प्रदान किया जा चुका है। भविष्य में विभाग में संविदा पर चयन किए जाने पर विचार नहीं किया जा सकता, लेकिन तीन जनवरी 2017 को मुख्य सचिव ने इन्हें भी नियुक्ति के आदेश कर दिए। 
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शासन में विभागीय नोटिंग तो हमेशा निगेटिव ही आती है, महिला न्यूनतम शैक्षिक योग्यता पूरी कर रही थी। वहीं, इस मामले में मंत्री का भी अनुमोदन था, रहा पलडिया की नियुक्ति का सवाल उन पर जो आरोप था वह साबित नहीं हुआ। 
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- एस रामास्वामी, मुख्य सचिव उत्तराखंड शासन
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