उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में दस साल बाद बेरोजगारों को नौकरी का मौका मिला, लेकिन उनके इस हक पर पहले से सहायक अध्यापक के तौर पर काम कर रहे शिक्षकों ने डाका डाल दिया।
दरअसल, नियुक्ति प्रक्रिया में ऐसे कई शिक्षकों ने भी आवेदन किया, जिनमें से 150 दोबारा चुन भी लिए गए। यानी इतने ही बीएड-टीईटी प्रशिक्षित बेरोजगारों के प्राइमरी स्कूलों में नौकरी पाने के आखिरी अवसर को इन शिक्षकों ने समाप्त कर दिया। खास बात यह है कि शिक्षा विभाग इन शिक्षकों को इस प्रक्रिया से बाहर रखने से असमर्थता जता रहा है।
इसलिए किया खेल
सूत्र बताते हैं कि दुर्गम स्कूलों में तैनात इन शिक्षकों ने सुगम स्थानों पर आने के लिए यह खेल किया है। 31 जनवरी 2014 को तत्कालीन प्रमुख सचिव शिक्षा एस राजू के आदेश में स्पष्ट है कि अभ्यर्थी के बीएड करने के वर्ष के आधार पर वरिष्ठता दी जानी है।
इसी आधार पर उन्हें तैनाती वाले जिले का आवंटन होना है। दोबारा चयनित हुए शिक्षक वर्ष 2011-12 में प्रशिक्षु अध्यापक के तौर पर चुने गए थे और अब प्रदेश के दुर्गम स्कूलों में तैनात हैं।
इनमें से अधिकतर शिक्षकों ने बीएड भी वर्षों पूर्व का किया हुआ है। जबकि बेरोजगार युवाओं में अधिकतर 2005-06 के बाद बीएड डिग्री पाए युवा हैं। ऐसे में अब ये शिक्षक मनचाहे जिलों में वरिष्ठता के आधार पर नियुक्ति पा जाएंगे।
दूसरे जीओ ने भी की खेल में मदद
शिक्षा विभाग में इस भर्ती से पहले तक नियुक्ति प्रक्रिया में शिक्षकों को उसी जनपद में नियुक्ति दी जाती थी, जिस जिले से उन्होंने आवेदन किया हो। लेकिन इस दफा पहली बार आवेदकों से जनपदों के विकल्प मांगे गए।
सूत्रों की मानें तो यह शासनादेश बेरोजगारों का सपना तोड़ने वाले सहायक अध्यापकों के लिए मुफीद रहा। इन शिक्षकों ने विकल्प में मनचाहे जिले भरे और अब चयन के बाद ये संबंधित जिलों में तैनाती पाने में कामयाब भी रहेंगे।
विभाग को थी पूरी जानकारी
सूत्रों के मुताबिक विभाग को ऐसा खेल होने की आशंका थी। यही वजह रही कि निदेशक प्रारंभिक शिक्षा राकेश कुंवर ने शिक्षकों के आवेदन करने की स्थिति में आवश्यक कदम उठाने पर मार्गदर्शन भी मांगा था।
जवाब में अपर सचिव राधिका झा ने कहा कि न्याय विभाग से मिले परामर्श के अनुसार सेवारत राज्य कर्मचारी किसी अन्य सरकारी पद के लिए आवेदन करते हैं तो सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेना जरूरी है। अनुमति मिलने पर आवेदन से रोका नहीं जा सकता।
अगर कर्मचारी अपने पद से त्यागपत्र दे दे तो उसे रोका नहीं जा सकता। सूत्रों की मानें तो अभी यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित शिक्षकों ने अनुमति ली है या नहीं, जबकि इनमें से किसी ने आवेदन के लिए त्यागपत्र नहीं दिया है।
पहले से शिक्षक होने के बावजूद फिर से चयनित होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या 150 है। नियमानुसार हम इन शिक्षकों को दोबारा आवेदन करने से नहीं रोक सकते। अभी तो सिर्फ चयनित सूची जारी हुई है। अभ्यर्थियों को काउंसिलिंग में बुलाया जाएगा, वहां सभी प्रमाणपत्रों की जांच होगी। वहीं यह भी देखेंगे कि इन शिक्षकों ने अनुमति प्राप्त की है या नहीं। इसके बाद ही नियुक्ति दी जाएगी।
- डॉ. आरडी शर्मा, अपर निदेशक, एससीईआरटी