राजधानी देहरादून में झंडे जी के विधिवत आरोहण के साथ शुक्रवार को मेले की शुरुआत हो गई। बृहस्पतिवार देर शाम तक दरबार साहिब में सादे गिलाफ की सिलाई होती रही।
अब तक 1200 सादे गिलाफ बुक हो चुके हैं। इनमें 40 गिलाफ झंडे जी को चढ़ाए जाएंगे। बाकी में इलायची दाना रखने के बाद श्रद्धालुओं में बांट दिया जाएगा।
एक महीने चलने वाले मेले के लिए करीब दो लाख श्रद्धालु दून आ चुके हैं। बृहस्पतिवार को परंपरा के मुताबिक महंत देवेंद्र दास ने पूरब की संगत को गुरुमंत्र देकर विधिवत विदाई की।
इस तरह होगा आरोहण
सुबह 8 बजे : झंडे जी के पुराने गिलाफ उतारे जाएंगे और दूध, दही, घी, गंगाजल आदि से विशेष अभिषेक होगा।
सुबह 10 बजे : पहले सादे गिलाफ चढ़ाए जाएंगे। एक बजे से शनील के गिलाफ और तीन से चार बजे के बीच दर्शनी गिलाफ चढ़ाए जाएंगे।
क्या हैं दर्शनी गिलाफ
झंडे जी को सबसे पहले सादे गिलाफ पहनाए जाते हैं। इसके बाद शनील और आखिर में दर्शनी गिलाफ पहनाया जाता है। माना जाता है कि सबके दर्शनों के लिए दर्शनी गिलाफ सबसे ऊपर रखा जाता है। इस वर्ष इसे पंजाब के गुरप्रीत सिंह चढ़ाएंगे।
हर बार आता है बाज
मान्यता के मुताबिक हर बार झंडे जी के आरोहण के दौरान एक बाज यहां जरूर आता है। बाज झंडे जी की 3-4 परिक्रमा करने के बाद वापस उड़ जाता है।
टेंट और धर्मशालाओं में ठहरे श्रद्घालु
1. मेला प्रभारी भगवती प्रसाद सकलानी ने बताया कि दून में करीब दो लाख श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। 300 टेंट मातावाला बाग में हैं। यहां 4-5 हजार लोग हैं।
2. एसजीआरआर बिंदाल, तालाब, राजा रोड, भंडारी बाग, रेसकोर्स, जैन , अग्रवाल, कालूमल और शिवाजी धर्मशाला में भी संगत ठहरी हैं।
3. दरबार साहिब समेत एसजीआरआर स्कूल की प्राइमरी और जूनियर शाखा दोनों जगह लंगर चलाए जा रहे हैं। श्रद्धालु भी सेवा में जुट गए हैं।
4. झंडे जी की सुरक्षा व्यवस्था के लिए 22 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
5. महंत इंद्रेश अस्पताल से डॉक्टरों की टीम हर वक्त मेले में मौजूद रहेगी।
6. मेला प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से 24 घंटे स्वयंसेवक तैनात किए हैं।