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झंडे जी का आरोहण, दरबार साहिब में जुटे लाखों

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राजधानी दून के दरबार साहिब में बुधवार शाम जैसे ही झंडे जी का आरोहण किया गया। लाखों श्रद्धालु ने झंडे जी के चढ़ते ही एक-दूसरे को बधाई देनी शुरू कर दी।
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दरबार साहिब के चारों ओर भीड़ का आलम यह था कि लोगों ने दूर से झंडे जी की रस्सी को छूकर नमन किया।

बुधवार शाम 4.20 बजे दरबार साहिब में झंडे जी का आरोहण महंत देवेंद्र दास के निर्देशानुसार हुआ। इस दौरान हर कोई झंडे जी को छूने के लिए बेकरार था। झंडे जी का आरोहण होते ही लोगों ने रंग-बिरंगे गुब्बारे आसमान में छोड़े और खुशी का इजहार किया।

जालंधर से आए महेंद्र सिंह ने दर्शनी गिलाफ चढ़ाया। साथ ही 20 शनील और 40 सादे गिलाफ चढ़ाए गए। लाखों की भीड़ में कई श्रद्धालु झंडे जी को छू नहीं पाए।

ऐसे लोगों तक झंडे जी की रस्सी बढ़ाई गई, जिसे छूकर लोगों ने नमन किया। कई लोगों ने स्क्रीन पर झंडे जी का आरोहण देखा और नमन किया। झंडे जी के आरोहण के साथ ही लोगों ने ढोल पर नाचना शुरू कर दिया।
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राजनीतिक था अस्पताल में हुआ हंगामा: महंत

झंडे जी के आरोहण के बाद महंत देवेंद्र दास ने कहा कि यह मेला 350 सालों से ऐसे ही आयोजित होता आ रहा है। मंगलवार को महंत इंद्रेश अस्पताल में बच्चे का शव नहीं दिए जाने के आरोप पर हुए हंगामे के संबंध में महंत ने कहा कि यह कुछ लोगों की राजनीतिक महत्वाकांक्षा के अलावा कुछ नहीं था।

सभी प्रक्रियाएं समय पर की जा रही थीं। वहीं, स्वाइन फ्लू को अफवाह बताते हुए उन्होंने कहा कि इसे बेवजह तूल दिया जा रहा है। बताया कि महंत इंद्रेश अस्पताल में स्वाइन फ्लू की जांच के लिए रैपिड टेस्ट किया जा रहा है।

न्यूजीलैंड से पहुंचे दून
न्यूजीलैंड में रहने वाले धर्मपाल पत्नी गुरबख्श संग झंडे जी के दर्शन को पहुंचे। बताया कि वे न्यूजीलैंड से 11 सालों से लगातार यहां आ रहे हैं।

हालांकि बेटा-बहू के नौकरी करने की वजह से पोता-पोती को देखने के लिए कोई नहीं रहता, लेकिन गुरु के दर्शन के लिए बेटा-बहू खुद उन्हें यहां भेजते हैं।
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गुरु के आशीर्वाद से पूरी हुई आस

फगवाड़ा, पंजाब से आई सोनिया पॉल ने बताया कि मामा-मामी को दस सालों से कोई संतान नहीं थी। वे लोग पिछले साल दरबार साहिब आए और गुरु का आशीर्वाद लिया। इस साल उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हो गई। बताया कि 6 सालों से हमारी भी संतान नहीं है। इस बार मैंने भी गुरु से संतान का आशीर्वाद मांगा है।

पूरी हुई दर्शन की कामना
भटिंडा, पंजाब से पहुंची मनिंद्र कौर के ससुराल वाले कई सालों से यहां आते हैं। मनिंद्र की शादी तीन साल पहले हुई थी और उनकी भी यहां आने की इच्छा थी। बुधवार को पहली बार झंडे जी के दर्शन कर उनकी मनोकामना पूरी हो गई।

25 सालों से आ रही पैदल
मोहाली, चंडीगढ़ से आई मनजीत कौर 25 सालों से यहां पैदल आ रही हैं। मनजीत ने बताया कि उनके पूर्वज 60 सालों से दरबार साहिब में आ रहे हैं। वह भी शादी के बाद से यानी 25 सालों से ससुराल वालों के साथ पैदल झंडे आरोहण के मौके पर पहुंचती हैं।
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