देहरादून। विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ करने केलिए शुरू की गई आरएपीडीआरपी योजना के तहत झाझरा से बसंत विहार तक निर्माणाधीन 33 केवी लाइन लाखों खर्च करने के बाद भी अधूरी है। लाइन के लिए लगाए गए खंभे और तारटूटकर जमीन पर पड़े हैं। बावजूद इसके ऊर्जा निगम और निर्माणदायी संस्था इसकी सुध लेने को तैयार नहीं है ।
उत्तराखंड की विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र ने आरएपीडीआरपी योजना शुरू की है। योजना के तहत उत्तराखंड में करोड़ों रुपये के क ार्य कराए गए हैैं। अकेलेे दून में ही ऊर्जा निगम इस योजना के तहत 180 करोड़ रुपये तक खर्च कर चुकाहै। इसी योजना के तहत ऊर्जा निगम ने झाझरा से बसंत विहार तक लगभग 14 किलोमीटर 33 केवी की नई लाइन बननी है। ऊर्जा निगम ने इसका ठेका फेडरल स्लायड कंपनी को दिया है, लेकिन बिना पूर्व कार्ययोजना के कंपनी ने लाइन का कार्य शुरू कर दिया। लाइन के नीचे कई स्थानीय लोगों और चाय बागान की जमीन आ रही है। पूर्व में सहमति न लेने के कारण चाय बगान और स्थानीय लोगों ने इसका विरोध कर दिया। इसके बाद से कंपनी ने काम जहां का तहां छोड़ दिया है।
कंपनी को 45 प्रतिशत भुगतान कर चुका है ऊर्जा निगम
बताया जा रहा है कि ऊर्जा निगम इन लाइन के निर्माण के लिए कंपनी को 45 प्रतिशत भुगतान कर चुका है। हालांकि ऊर्जा निगम के अधिकारी भुगतान से इंनकार कर रहे हैैं। अधिकारियों की मानें तो निगम कंपनी को तब भुगतान करेगी जब लाइन का पूरा काम हो जाएगा। हालांकि भुगतान होने की दशा में अधिकारियों का कहना है कि इसे बाद में अन्य कार्यों में एडजस्ट किया जा सकता है।
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विद्युत लाइन का निर्माण झाझरा से बसंत विहार तक किया जाना था, लेकिन स्थानीय लोगों व टी स्टेट के विरोध के कारण लाइन निर्माण का कार्य पूरा नहीं हो पाया है। अब लाइन को अंडरग्राउंड बनाने के साथ ही कोई दूसरा विकल्प निकाला जाएगा। इस संबंध में जल्द ही कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
-बीसीके मिश्रा, प्रबंध निदेशक, यूपीसीएल