जौनसार बावर के प्रसिद्ध पर्व बिस्सू का फूलियात के साथ सोमवार को आगाज हो गया। पहले दिन घर के मुखिया जंगलों से बुरांस के फूल लाए और घर के द्वार को सजाया। साथ ही परिवार के साथ देवताओं को अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। लोगों ने चावल के पापड़ और हलुआ-पूरी समेत कई पकवानों का लुत्फ उठाया।
लॉकडाउन के चलते क्षेत्र के मंदिरों में ताला लटका रहा। ऐसे में लोगों ने बाहर से ही देवता के दर्शन किए। भंजरा-पंचरा, सिमोग, कनबुआ, बमराड़, थैना, गबेला, डिमोऊ समेत तमाम मंदिरों में लोगों ने बाहर से ही देवता के दर्शन कर सुख और समृद्धि की कामना की।
किसी भी मंदिर परिसर में देव डोली को दर्शन के लिए नहीं निकाला गया। महासू मंदिर भंजरा पंचरा खत सिलगांव समिति के अध्यक्ष कृपाराम शर्मा का कहना है कि यह पहला मौका है जब पर्व पर क्षेत्र के तमाम मंदिर परिसरों में सन्नाटा पसरा हुआ है। जौनसार बावर क्षेत्र हमेशा से अपनी अलग संस्कृति के लिए जाना जाता रहा है।
हर साल बैसाख माह में क्षेत्र में बिस्सू पर्व का आयोजन किया जाता है। पांच दिनों तक क्षेत्र के विभिन्न गांव में इस पर्व की धूम रहती है। पंचायती आंगनों में लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। साथ ही कई जगहों पर बड़े स्तर मेले का आयोजन होता है, लेकिन इस बार महामारी के प्रकोप को देखते हुए क्षेत्र में सभी बिस्सू मेले रद्द कर दिए गए हैं। ऐसे में लोग घरों में ही पर्व मना रहे हैं।