हरिद्वार में गुजराती यात्री तो बहुत आए पर जसोदा बेन कहीं दिखाई नहीं दीं। जिन आश्रमों और धर्मशालाओं में गुजराती ठहरते हैं, दिन भर जसोदा बेन की खोजबीन होती रही।
रेलवे स्टेशन पर भी पुरोहितों के साथ-साथ कईं निगाहें लगी रहीं। जसोदा बेन का नाम जब से नरेंद्र मोदी ने अपने नामांकन पत्र में लिखा, तब से वे सुर्खियों में हैं।
बेन ने आज तक कभी भी किसी से न कोई बात की, न गिला न शिकवा। वे देश के चार धामों की यात्रा पर निकली हुईं है।
जसोदा बेन कहीं नजर नहीं आयीं
देश भर का मीडिया उन्हें रामेश्वरम्, द्वारिका और जगन्नाथ पुरी के साथ-साथ रास्ते में पड़ने वाले अन्य तीर्थों पर भी तलाशता रहा। वे कहीं भी नजर नहीं आयी। जिन 40 लोगों के साथ वे निकली हुई हैं, वे भी किसी को न मिले।
अनुमान लगाया जा रहा था कि वे आज हरिद्वार पहुंच जाएगी। गुजरातियों के कच्छी आश्रम, समन्वय कुटीर, शांतिकुंज तथा गुजरात भवन के प्रबंधक बता रहे थे कि गुजरात से कुछ दल 28 को आ गए और कुछ 29 को आएंगे।
आने वाले सभी दलों पर निगाहें लगी रही किंतु जसोदा बेन कहीं नजर नहीं आयी। वे चुपचाप आकर किसी होटल आदि में ठहर गयी हो तो उनका पता लगाना और भी मुश्किल हो जाएगा। रेलवे स्टेशन पर आए गुजराती भी यह न बता पाए कि जसोदा बेन कहां है।
जाना कहां-कहां यह भी पता नहीं
जसोदा बेन को उत्तराखंड के चारों धाम जाना है अथवा देश के चार धामों में से एक बद्रीनाथ। यह किसी को पता नहीं। उनके पुरोहित अंदाज से बता रहे हैं कि देश की चारधाम यात्रा करने वाले आमतौर से बद्रीनाथ धाम ही जाते हैं।
यदि उन्हें केवल बद्रीनाथ जाना है तो वहां के कपाट खुलने में पूरा एक सप्ताह बाकी है। जसोदा बेन की खोजबीन अभी चलती रहेगी।
गुजरात से आने वाले यात्री अनजान
कच्छी आश्रम में सोमवार को करीब 35 यात्री छोटे-छोटे समूह में आये। वे नहीं जानते कि जसोदा बेन नरेंद्र मोदी की पत्नी है और हरिद्वार आ रही है। गुजरात भवन में गुजरात से करीब 55 यात्री पहुंचे हैं। उनमे जसोदा बेन को कोई नहीं जानता। समन्वय सेवा कुटीर भारतामाता मंदिर के प्रबंधक न्यायमित्र शर्मा के अनुसार, जसोदा बेन के आने की उन्हें कोई जानकारी नहीं।