मधुबन आश्रम के प्रबंधक और व्यवस्थापक हर्ष कुमार कौशल ने बताया कि शुक्रवार को गायन, नृत्य और क्विज प्रतियोगिता आयोजित की जाएंगी। इसी दिन प्रतियोगिताओं का परिणाम घोषित कर छात्र-छात्राओं को पुरस्कार बांटे जाएंगे।
24 अगस्त को आश्रम में कृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम से मनायी जाएगी। इस दौरान मंदिर में 24 घंटे कीर्तन चलते रहेंगे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस के अलावा एनसीसी और स्काउट के छात्र-छात्राएं भी सहयोग करेंगे।
आचार्य डॉ चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने बताया कि प्रतिवर्ष दो प्रकार से श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष भी गृहस्थ आज व्रत और वैष्णव साधु संत कल शनिवार को व्रत रखेंगे। गृहस्थ आज दिन भर व्रत रखकर रात्रि को चंद्रमा को अर्ध्य देकर व्रत का परायण कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि सभी भारतीय पंचांगों में अष्टमी तिथि आज सुबह 8:11 से शुरू हो रही है, जो 24 अगस्त सुबह 8:40 पर समाप्त होगी। वहीं रोहिणी नक्षत्र 23 अगस्त की रात्रि 11:46 से शुरू होकर 25 अगस्त सुबह 4:17 तक रहेगा।
भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र में रात्रि 12 बजे हुआ था। कंस के अत्याचारों से परेशान गृहस्थ धर्म के लोगों ने मथुरा में पहले से व्रत रखा था। भगवान का रात्रि को जब जन्म हो गया तो उन्होंने दूसरे दिन उत्सव मनाया, जबकि संतों महात्माओं ने दूसरे दिन इस व्रत को रखा। इसलिए इसे व्रतराज भी कहा जाता है।
आचार्य डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल के मुताबिक विभिन्न राशि के जातकों को अलग-अलग सामग्री से भगवान कृष्ण का पूजन करना चाहिए।
मेष मोर पंख एवं बूंदी के लड्डू, वृषभ माखन मिश्री, मिथुन सफेद तिल के लड्डू से, कर्क दूध दही से, सिंह पीले फूल और जोर से, कन्या दूध दही से, तुला सफेद फूल तुलसी दल से, वृश्चिक लाल फूलों से, धनु गोधूम चूर्ण पीले फूलों से, मकर काले तिल गुड़हल के फूलों से, कुंभ बांसुरी मोर पंख एवं काले तिलों से, मीन गोधूम चूर्ण एवं पीले फूल एवं फलों से पूजन करें तो मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी।
मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भादो (भाद्रपद) माह की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। अष्टमी तिथि के हिसाब से 23 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी और रोहिणी नक्षत्र के हिसाब से 24 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। जन्माष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त 23 अगस्त को रात 12:08 बजे से 1:04 बजे तक है।
मान्यता के अनुसार व्रत का पारण अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के बाद ही करना चाहिए। अगर दोनों संयोग एक नहीं बन रहे हैं तो अष्टमी या रोहिणी नक्षत्र के बाद व्रत पूरा कर सकते हैं। ऐसे में 24 अगस्त को पूजा का मुहूर्त 12:01 बजे से 12:46 बजे तक रहेगा। पारण का समय सुबह 6 बजे के बाद होगा।