जमरानी बांध परियोजना को मंजूरी मिलने के तुरंत बाद केंद्र और राज्य सरकारें हरकत में आ गई हैं। सोमवार को देर शाम देहरादून मुख्यमंत्री कार्यालय से जमरानी को केंद्रीय परियोजना घोषित कराए जाने के संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजे जाने की सूचना है। कयास लगाए जा रहे हैं कि 14 फरवरी को रुद्रपुर दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जमरानी परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित कर सकते हैं।
परियोजना पर अब तक हुई कसरत
- जमरानी बांध परियोजना को 1975 में सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बाद 61.25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।
- सिंचाई विभाग ने 1981 में गौला बैराज का निर्माण किया। बैराज, 440 किमी नहरों, जमरानी कॉलोनी आदि के निर्माण में 25.24 करोड़ रुपये खर्च किए।
- 1989 में 144.84 करोड़ रुपये की डीपीआर भेजी भेजी गई। इस बीच बांध परियोजना की स्वीकृति में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की तमाम आपत्तियां लगती रहीं।
- 2015 में परियोजना की लागत 2350 करोड़ रुपये पहुंच गई।
- 20 जुलाई 2018 में 2850 करोड़ रुपये की डीपीआर संशोधित कर 2573.10 करोड़ की डीपीआर केंद्रीय जलायोग को सौंपी गई।
- फिर 2800 करोड़ की नई डीपीआर केंद्रीय जलायोग को सौंपी।
- 21 जनवरी 2019 में 2954.45 करोड़ रुपये की डीपीआर सौंपी।
- चार फरवरी 2019 को 2584.10 करोड़ रुपये की अंतिम डीपीआर पर लगी मंजूरी की मुहर।
- 9 किमी लंबा, 130 मीटर चौड़ा और 485 मीटर ऊंचा बनेगा बांध
- 368 हेक्टेयर वन क्षेत्र में फैला है
- 142.3 मिलियन क्यूबिक लीटर पानी मिलेगा बांध से
- 42.7 एमसीएम पानी शुद्ध पेयजल के लिए मिलेगा
- 61 एमसीएम उत्तरप्रदेश को, 38.6 एमसीएम पानी उत्तराखंड को सिंचाई के लिए मिलेगा
- 14 मेगावाट बिजली का होगा उत्पादन
- 129 परिवारों की 688 की आबादी का होना है विस्थापन, सिंचाई विभाग विस्थापितों को भूमि उपलब्ध नहीं करा पाने की स्थिति में मौजूदा बाजार दर पर मुआवजा देगा।