-राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने दिया जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। उत्तराखंड में जमरानी और लखवाड़ परियोजना हर खेत को पानी देने में गेमचेंजर साबित होगी। दोगुनी से अधिक सिंचित कृषि भूमि हो जाएगी। सांसद महेंद्र भट्ट के सवाल के जवाब में राज्यसभा में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने ये जवाब दिया।
ठाकुर ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने जलवायु परिवर्तन के प्रति राष्ट्रीय नवाचार परियोजना के अंतर्गत अंतरसरकारी जलवायु परिवर्तन पैनल आईपीसीसी प्रोटोकॉल का उपयोग करते हुए उत्तराखंड सहित भारतीय कृषि के जलवायु परिवर्तन के जोखिम और संवेदनशीलता का आकलन किया। कुल 109 जिलों को अत्यंत उच्च जोखिम वाली श्रेणी में और 201 जिलों को अत्यधिक जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। उत्तराखंड में उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल, पिथौरागढ़, बागेश्वर, अल्मोड़ा और चंपावत अत्यंत उच्च जोखिम वाली श्रेणी में आते हैं। जबकि चमोली और पौड़ी गढ़वाल उच्च जोखिम वाली श्रेणी में आते हैं जो नमी की कमी, सूखे के प्रति संवेदनशील हैं।
जमरानी बांध बहुउद्देशीय परियोजना से 57.07 हजार हेक्टेयर और लखवाड़ बहुउद्देशीय राष्ट्रीय परियोजना की सिंचाई क्षमता 33.78 हजार हेक्टेयर है। इनसे उत्तराखंड को लाभ होता है। मानसून के दौरान जल भंडारण और कम सिंचाई वाले मौसम में इसके नियमित उपयोग में सुविधा मिलती है, जिससे वर्षा पर निर्भरता कम होती है। उत्तराखंड में अब तक सतही लघु सिंचाई योजना के तहत लगभग 29.92 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता सृजित की गई है। पीएमकेएसवाई के भूमि संसाधन विभाग की ओर से वाटरशेड विकास घटक का कार्यान्वयन किया जा रहा है। उत्तराखंड में वर्ष 2015-16 से 2021-22 के दौरान 62 वाटरशेड विकास परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 2021-26 के दौरान डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई-2.0 के तहत 15 वाटरशेड विकास परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से अब तक 35,647 हेक्टेयर क्षेत्र सूक्ष्म सिंचाई के अंतर्गत कवर किया गया है।