बेहद गरीब पृष्ठभूमि और नासूर बन चुके आतंकवाद का साया, मगर फिर भी जिंदगी जीने के मायने जुदा। दहशतगर्दों की जमीन पर खौफ में जिंदगी के सुनहरे सपने बुनने वाली कश्मीर की बालिकाएं छोटी-मोटी परेशानी में जिंदगी से हार मामले वालों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं।
शैक्षणिक भ्रमण पर तीर्थनगरी पहुंची जम्मू के जनक मदान गर्ल्स हॉस्टल की नन्ही छात्राएं आध्यात्म और गंगा से रूबरू हुईं।
उन्होंने नगर के मठ-मंदिरों, तीर्थस्थलों और गंगा तटों का भ्रमण किया। हॉस्टल के सेवा प्रमुख जयदेव और डा. आशीष मल्होत्रा बताते हैं कि दल में लेह-लद्दाख, कश्मीर, पुंछ आदि आतंक प्रभावित क्षेत्रों की 20 छात्राएं शामिल हैं। जिनकी शिक्षा-दीक्षा और भरण-पोषण की पूरी जिम्मेदारी छात्रावास प्रबंधन की है।
छात्राओं को आतंकी खौफ से उबारने और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देने के लिए उन्हें संगीत, लोक संस्कृति, सभ्यता, विरासत और आधुनिक अनुसंधानों से भी रूबरू कराया जाता है।
बताया कि बचपन दहशतगर्दी माहौल से भरा होने के बाद भी छात्राओं की महत्वाकांक्षाएं किसी से कम नहीं। इन छात्राओं में प्रधानमंत्री के रूप में देश की बागडोर संभालने, इंजीनियर, डाक्टर आदि बनने की चाह बलवती है।
क्या कहती है छात्राएं
छात्रा रफ्ता, तमन्ना, रितू, और डोलमा बताती है कि उन्होंने बचपन से ही गोलियों और बमों के धमाके सुने हैं। दहशतगर्दों के हाथों मासूम और बेसहारा लोगों को मरते देखा है। छात्राओं का मानना है कि आतंकवादियों के दिलों से वैमनष्यता कभी खत्म नहीं हो सकती। मगर इसकी उन्हें बिल्कुल भी परवाह नहीं है।
उनका मानना है कि ऐसी घटनाओं से दिल में देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा पैदा होता है। बस उनकी भगवान से एक दुआ है कश्मीर में भी अमन और शांति की कायम रहे।