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जाम ने निकाली यात्रियों की 'जान'

Fri, 11 Oct 2013 09:04 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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रोडवेज कर्मचारियों ने गुरुवार की सुबह 11 बजे आईएसबीटी के बाहर चौक पर जाम लगा दिया।
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यह कर्मचारी निजी बस संचालकों को परमिट जारी करने के विरोध में आईएसबीटी में चक्काजाम के लिए जुटे थे। इस दौरान भीड़ को कांस्टेबल ने टोका तो वहां हंगामा खड़ा हो गया।

यात्रियों की फजीहत
कांस्टेबल से उलझने के बाद कर्मचारियों ने आईएसबीटी चौक पर जाम लगा दिया। इससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। यात्रियों की खासी फजीहत हुई। दिल्ली, हरिद्वार रूट पर बसें न मिलने से वह परेशान रहे।
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कर्मचारियों के प्रदर्शन के कारण हरिद्वार और दिल्ली राजमार्ग लगभग तीन घंटे जबरदस्त जाम रहा। दोपहर 12 बजे जाम में कई ट्रक भी फंस गए, जिससे समस्या बढ़ गई। चक्का जाम समाप्त होने के बाद पुलिस एक घंटे तक यातायात को सामान्य करने में जुटी रही।

नेशनल हाईवे जाम की सूचना पर एसपी सिटी डा. जगदीश चंद्र मौके पर पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों को समझाया, लेकिन बात नहीं बनी। करीब तीन घंटे बाद कर्मचारी खुद ही सड़क से हट गए।  

...तो होगा प्रदेशव्यापी चक्का जाम
जाम के दौरान सड़क पर ही आयोजित सभा में परिवहन निगम कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के सचिव विजय कुमार ममगांई ने कहा कि एसटीए ने राष्ट्रीयकृत मार्गों पर निजी बसों को गैर कानूनी तरीके से परमिट जारी किए हैं।

उन्होंने चेताया कि अगर पुलिस ने कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का प्रयास किया तो प्रदेशव्यापी चक्का जाम किया जाएगा। परमिट निरस्त होने तक आंदोलन जारी रहने की बात कही।

मोर्चे के संयोजक अशोक कुमार, दयाकिशन पाठक, आरसी आर्य, दिनेश गोसाई, रामचंद्र रतूड़ी, हरेंद्र कुमार, केपी सिंह आदि उपस्थित रहे।

वर्कशॉप में धरना
निजी बस ऑपरेटरों को परमिट जारी करने के विरोध में उत्तराखंड रोडवेज इंप्लॉइज यूनियन ने भी हरिद्वार रोड स्थित वर्कशॉप में धरना दिया। यहां हुई सभा में प्रांतीय महामंत्री रवि पचौरी ने परमिटों को तुरंत निरस्त करने की मांग उठाई।
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इस संबंध में यूनियन की ओर से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा गया। इस अवसर पर प्रांतीय अध्यक्ष सरदार प्रीतम सिंह, क्षेत्री मंत्री भोला दत्त जोशी आदि शामिल रहे।

जनता हुई परेशान
सहारनपुर जाना था, लेकिन बस नहीं। यहां जाम लगा है। चक्का जाम करने वाले जनता की परेशानी भी देखे।
- तालिब

जनता की दिक्कत का ख्याल किसी को नहीं। हर कोई अपने बारे में सोचता है। कर्मचारी आम लोगों की भी तो सोचें।
- शफीक

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