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जागड़ा पर्व पर लोक गीतों पर झूमा थैना

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महासू मदिर थैना में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में गीतों की प्रस्तुति देते लोक गायक महेंद्र चौ - फोटो : VIKAS NAGAR
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कालसी। थैना गांव स्थित महासू मंदिर में आयोजित जागड़ा पर्व के दूसरे दिन लोक संस्कृति की मनमोहक छटा देखने को मिली। लोक कलाकारों ने गीतों और नृत्य की ऐसी प्रस्तुति दी की हर कोई मंत्र मुग्ध हो गया। कार्यक्रम का शुभारंभ यूजेवीएनएल डाकपत्थर के सहायक अभियंता संदीप चौहान और ओएनजीसी मुंबई के पूर्व रिटायर्ड जीएम प्रताप सिंह चौहान ने संयुक्त रूप से किया।
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लोक गायक सीताराम चौहान ने महासू देवता की वंदना के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत की। उन्होंने देवा रे देवा हनोली के देवातु थइने के देवा तू, नराय दी चुंगी ले देवा छोड़ी पालकिया भजन गाकर महासू देवता की वंदना की। जिसके बाद उनके मिलकर बा मोटे लाले भीम उड़े उड़ेले, सानिया सुनारों मेरा भी मुंह दे घड़ी, दो रूपो की रानी ओ मेरी ध्यानी तू जाड़ी, झैड़ो फुपीये गीतों पर लोग जमकर झूमे। लोक गायक महेंद्र चौहान के केसरी को मितोले केसु सियाणा बजीरा ले, पर्वत की मल्हारी, गज्जू मौला, मोडे रे मोडाईये ला खेली मोडाईये गीतों पर पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा। अरविंद राणा ने जौनसारों ले बाको में रो बावरा जौनसारो ले, ऊंचे पहाड़ों चले घूमने पहाड़ों का नजारा देखना चाल है शिमला गीतों की प्रस्तुति दी। गढ़वाली लोक गायक धूम सिंह रावत ने मैं सारुली मेरु जिया लगी गो तेरी रौतेली मूखुड़ी मां गीत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में लोक गायिका सानवी तोमर, कल्पना चौहान, सीमा चौहान ने भी गीतों की प्रस्तुति देकर समा बांधा। इस अवसर पर नवयुग प्रगति संघ के अध्यक्ष गंभीर तोमर, कर्मचारी संघ के अध्यक्ष यशपाल तोमर, हुकम सिंह तोमर, शूरवीर तोमर, सीताराम चौहान, देवी सिंह तोमर, महावीर तोमर, गोपाल तोमर, निर्मल तोमर, शशि पाल तोमर, विक्रम राजगुरु, नीटू राजगुरु, भीम दत्त वर्मा, रघु तोमर, जयपाल तोमर, प्रभु लाल राजगुरु, भोपाल सिंह भंडारी मौजूद रहे।
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