संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक उत्तराखंड के टिहरी, भटवाड़ी, मुनस्यारी, हरिद्वार, पिथौरागढ़, गरुड़गंगा व कौसानी में उपकरण लगाए गए हैं। हिमाचल प्रदेश के नद्दी, रेवालसर, टिस्सा, कोठी, धर्मपुर, ऊना, बादल में, हरियाणा के सागा व जम्मू कश्मीर के उड़ी, जोड़ियां, टोजन, लेथीपुरा, व नंदीग्राम में उपकरण लगाए गए हैं।
स्थान की ओर से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा व जम्मू कश्मीर में लगाए गए सिस्मोग्राफ , एक्सेलेरो ग्राफ को वी सैट से जोड़ा जा रहा है। कई उपकरणों को जोड़ भी दिया गया है। सभी उपकरणों को सेटेलाइट से जोड़ने के बाद इन राज्यों के अलावा अन्य इलाकों में आने वाले भूकंप से जुड़ी तमाम जानकारियां सेटेलाइट के जरिए संस्थान के वैज्ञानिकों को तत्काल मिल सकेंगी। जानकारी मिलने पर संस्थान वैज्ञानिक भूकंप से जुड़े तमाम डाटा का विश्लेषण कर सकेंगे।
- डॉ. सुशील कुमार, विभागाध्यक्ष भूकंप विज्ञान, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी