देहरादून। धाद साहित्य एकांश संस्था की ओर से रविवार को शास्त्री नगर स्थित एक वेडिंग प्वाइंट में मासिक कवि गोष्ठी हुई। इसमें कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कवि सुनील त्रिवेदी ने ‘जननायक बनना सरल नहीं है, ये खेल है त्याग तपस्या का...’ सुनाया तो मौजूद लोगों ने खूब तालियां बजाईं। शायरा निकी पुष्कर ने ‘कुछ भी तो किसी से निहां न रह सका, आईना होके ये खसारा हुआ और उम्र भर के लिए मेरे साथ ही रह गया... सुनाया। कवियत्री सुजाता पटनी ने ‘सीता, सावित्री और उर्मिला के गौरव को फिर पुनर्जीवित कर दे... सुनाकर तालियां बटोरी। शायर अवनीश उनियाल ने तरन्नुम से गजल मेरी आवाज में लर्जिश आपकी, मेरे सुर हैं मगर बंदिशें आपकी... सुनाया। संस्था अध्यक्ष कल्पना बहुगुणा ने ‘तुम आना जरूर आना, चाहे कैक्टस बनकर आना...’ सुनाया। गोष्ठी की अध्यक्षता कवियत्री डॉ. नीलम प्रभा वर्मा और संचालन मंजू काला ने किया।