-दून अस्पताल की इमरजेंसी में आए मल्टीट्राॅमा के मरीज को भर्ती करने के लिए हाथ पीछे खींच रहे चिकित्सक
दून अस्पताल की इमरजेंसी इमरजेंसी में आने वाले मरीज को कौन से चिकित्सक की निगरानी में भर्ती किया जाएगा, यह तय कर पाना काफी मुश्किल हो रहा है। इमरजेंसी में आने वाले ज्यादातर मरीज मल्टीट्रॉमा का शिकार होते हैं। उनके उपचार के लिए अलग-अलग विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों की आवश्यकता होती है। लेकिन ट्राॅमा की प्राथमिकता तय करने में अस्पताल प्रबंधन के पसीने छूट रहे हैं।
इमरजेंसी में आने वाले ज्यादातर मरीज मल्टीट्रॉमा से जूझते हैं। ऐसे में उन्हें कई बार सिर, पैर, हाथ, पेट और आंख समेत शरीर में विभिन्न हिस्सों में चोंट लगी होती है। इन मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के बाद जब भर्ती करने की बारी आती है तो चिकित्सक इसे अपनी निगरानी में भर्ती करने में हाथ पीछे खींच लेते हैं।
चूंकि मरीज को अलग-अलग समस्याएं होती हैं तो चिकित्सकों को लगता है कि मरीज किसी दूसरे चिकित्सक की निगरानी में भर्ती हो। इन सब के बीच मरीज को काफी परेशानी होती है। साथ ही इलाज में भी देरी होती है।
आयुष्मान के लाभार्थी मरीज को एक ही चिकित्सक के अंडर में होना अनिवार्य
दून अस्पताल में आने वाले अधिकतर मरीजों को आयुष्मान के तहत भर्ती किया जाता है। इसमें मरीज का एडमिशन सिर्फ एक ही चिकित्सक के अंडर में होना अनिवार्य है। ऐसी स्थिति में अस्पताल प्रबंधन के पास यह विकल्प ही नहीं बचता है कि वे एक मरीज को एक से अधिक चिकित्सक की देखरेख में भर्ती कर सकें। ऐसे में मरीज को भर्ती करने के लिए सभी चिकित्सकों से राय लेनी पड़ती है। यही कारण है कि वे एक-दूसरे पर बात डालते नजर आते हैं।
इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को भर्ती करने के लिए एसओपी तैयार की जा रही है। ट्रॉमा की प्राथमिकता के आधार पर मरीज को संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सक की निगरानी में भर्ती किया जाएगा। साथ ही इमरजेंसी से संबंधित सभी एसओपी को बहुत जल्द दीवारों पर चस्पा कर दिया जाएगा। -डॉ. नंदन सिंह बिष्ट, उप चिकित्सा अधीक्षक व इमरजेंसी इंचार्ज दून अस्पताल