वर्ष 2013 में आईएससी (12वीं) में पूरे देश में टॉप करने वाली दून की भुवन्या विजय ने अब नेशनल लॉ स्कूल बंगलूरू में टॉप किया है। उन्होंने यहां से पांच वर्षीय एलएलबी पास की है। भुवन्या इन दिनों लैंप (लेजिस्लेटिव असिस्टेंट टू मेंबर ऑफ पार्लियामेंट) फेलोशिप में कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य के साथ काम कर रही हैं। उनके पिता डॉ. विजय कुमार उत्तराखंड कैडर के आईएफएस हैं।
देहरादून के सेंट जोजेफ्स स्कूल से वर्ष 2013 में 98 प्रतिशत अंकों के साथ ऑल इंडिया टॉप कर भुवन्या विजय ने प्रदेश का नाम रोशन किया था। साइंस स्ट्रीम से 12वीं करने के बाद भुवन्या ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लैट) दिया। इस परीक्षा में भी उन्होंने पूरे देश में 14वीं रैंक हासिल की थी। इसके बाद उनका चयन आईआईएम इंदौर में पांच वर्षीय कोर्स के लिए भी हो गया था, लेकिन भुवन्या ने नेशनल लॉ स्कूल (एनएलएस) बंगलूरू चुना।
पांच साल की कड़ी मेहनत के बाद हाल ही में भुवन्या का फाइनल परीक्षा परिणाम जारी हुआ है। इस परीक्षा में उन्होंने सात में से 6.72 सीजीपीए (कम्यूलेटिव ग्रेड प्वाइंट एवरेज) हासिल कर टॉप किया है। भुवन्या का कहना है कि 12वीं में पूरे देश में टॉप करने के बाद भी चैलेंज कम नहीं था। उन्होंने बताया कि एनएलएस बंगलूरू में जाने के बाद चुनौतियां बढ़ गईं थीं। इस संस्थान में क्लैट के टॉप स्टूडेंट्स का दाखिला होता है। इसके बावजूद उन्होंने मेहनत से पढ़ाई की। इसका नतीजा अब रिजल्ट के तौर पर सामने आया। भुवन्या के पिता डॉ. विजय कुमार उत्तराखंड कैडर के आईएफएस हैं। उनकी मां सुनीता विजय लैंडस्केप डिजाइनर हैं। वह अपने मां-बाप की इकलौती संतान हैं।
विदेश से मास्टर्स करने के बाद प्रैक्टिस की चाहत
भुवन्या विजय अब एलएलबी के बाद किसी विदेशी विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री लेना चाहती हैं। एलएलएम के बाद अपने देश में ही प्रैक्टिस करने के साथ ही टीचिंग की भी इच्छा रखती हैं।
साइंस से पढ़कर करियर के लिए लॉ को चुना
भुवन्या विजय ने 12वीं तक की पढ़ाई साइंस स्ट्रीम में की। उन्होंने 12वीं में इंगलिश, मैथ्स, फिजिक्स, केमिस्ट्री और कंप्यूटर साइंस पढ़ा था, लेकिन उनका मन ह्यूमैनिटीज पढ़ने में लगता था। लिहाजा, 12वीं में ऑल इंडिया टॉप करने के बाद भी भुवन्या ने लॉ में करियर बनाने की राह चुनी।
मुश्किल था लेकिन नामुमकिन नहीं
भुवन्या का कहना है कि एनएलएस बंगलूरू से पढ़ना मुश्किल जरूर था लेकिन नामुमकिन नहीं था। अन्य विश्वविद्यालयों के सेमेस्टर की तुलना में एनएलएस बंगलूरू में ट्रिमेस्टर यानी हर तीन माह पर परीक्षा के बाद सिलेबस नया आ जाता है। ऐसे में काफी चुनौती थी।