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फाइलों में दबकर रह गईं सिंचाई नहरें, प्यासे हैं खेत

Tue, 04 Oct 2016 03:24 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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सिंचाई करना मुश्किल - फोटो : demo
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राजधानी में सिंचाई नहरें सिंचाई विभाग की फाइलों में दबकर रह गई हैं। कुछ नहरों के लिए धनराशि स्वीकृति के बावजूद इन पर काम शुरू नहीं हो पाया है। इससे किसानों के खेतों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। सिंचाई मंत्री यशपाल आर्य ने कहा कि केंद्र सरकार ने केंद्र से वित्त पोषित योजनाओं में 90 फीसदी की हिस्सेदारी देना बंद कर दिया। इस कारण योजनाओं में विलंब हो रहा है।
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सुसवा नदी से डोईवाला ब्लॉक के किशनपुर ग्रांट तक के लिए त्वरित सिंचाई लाभ योजना के तहत शासन ने केंद्र को 362 लाख प्रस्ताव भेजा गया था। वर्ष 2015 में योजना के लिए धनराशि स्वीकृत हुई, लेकिन स्वीकृत धनराशि से नहर बनी नहीं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि केंद्र की यह योजना समाप्त हो गई।

नहर के बनने से किसानपुर ग्रांट, नागल ज्वालापुर, दूधली, नागल बुलंदावाला के किसानों की 382 हेक्टेयर से अधिक भूमि को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलता। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नाबार्ड के तहत अब इस नहर के लिए प्रस्ताव पुनरीक्षित कर 492 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
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वहीं जर्जर हो चुकी साढ़े चार किलोमीटर लंबी सिमलासग्रांट सिंचाई नहर की मरम्मत, बुल्लावाला नहर को भूमिगत करने एवं जौलीग्रांट नहर की मरम्मत का काम भी विभाग और शासन में बैठे अधिकारियों की फाइलों में दबकर रह गया है। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता सुरेश रावत ने कहा कि केंद्र की त्वरित सिंचाई लाभ योजना बंद होने से सिंचाई नहर के निर्माण में देरी हुई है, विभाग की ओर से कई नहरों के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं, मंजूरी मिलते ही इन पर काम शुरू किया जाएगा। 
 
केंद्र पोषित सिंचाई योजनाओं में केंद्र से हमें झटका मिला है, लेकिन हम योजनाओं को बंद नहीं होने देंगे। प्रयास किया जाएगा कि जल्द काम शुरू किया जा सके। हम कई योजनाओं में राज्य का शेयर 10 फीसदी इस उम्मीद के साथ लगा चुक  हैं कि केंद्र 90 फीसदी की अपनी हिस्सेदारी देगा, लेकिन इन योजनाओं में ऐसा नहीं हुआ।
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-यशपाल आर्य, सिंचाई मंत्री
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