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...तो ठंडे हो जाएंगे हजारों घरों के चूल्हे

Sat, 04 Jan 2014 11:24 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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राजधानी देहरादून में हजारों घरों के चूल्हों के ठंडे होने का संकट बढ़ता जा रहा है। भाड़ा बढ़ाने की मांग पर इंडियन ऑयल कार्पोरेशन (आईओसी) के ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का असर नजर आने लगा है।
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हालांकि, कंपनी ने करनाल, काशीपुर, हल्द्वानी और मथुरा से सिलेंडर आपूर्ति की व्यवस्था की है लेकिन मांग के अनुरूप कम आपूर्ति से खासी परेशानी हो रही है। हड़ताल से हर रोज करीब दस हजार उपभोक्ताओं को दिक्कत हो रही है। एजेंसियों पर भी आपूर्ति का दबाव है।

बैकलॉग एजेंसियों पर आ गया
इमरजेंसी स्टॉक में रखे सिलेंडर खत्म होने के बाद हफ्ते भर का बैकलॉग एजेंसियों पर आ गया है। रेसकोर्स स्थित उत्तरांचल गैस सर्विस के संचालक तनवीर ने बताया कि शहर में हर एजेंसी पर हर रोज 300 से 350 सिलेंडर का एवरेज है, लेकिन आपूर्ति ठप होने से दबाव बढ़ने लगा है।
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वैकल्पिक व्यवस्था भी कारगर साबित नहीं हो रही। उधर, शुक्रवार को भी आईओसी अधिकारियों की ट्रांसपोटरों संग बैठक हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकलने से आपूर्ति सामान्य होना संभव नहीं है। दून एलपीजी एसोसिएशन के अध्यक्ष चमनलाल ने कहा कि बैकलॉग बढ़ता जा रहा है। यही हाल रहा तो दिक्कत बढ़ जाएगी।

कालाबाजारी का खेल शुरू
आपूर्ति कम होने के साथ ही शहर में कालाबाजारी का खेल शुरू हो गया है। घरेलू और कामर्शियल सिलेंडरों से रीफिलिंग करने वाले लोगों ने सिलेंडर महंगी कीमत में बेचने शुरू कर दिए हैं। 1308 रुपये के घरेलू सिलेंडर के लिए 2000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। यही हाल कामर्शियल सिलेंडर का है।

छोटे सिलेंडर भी महंगे
नॉन सब्सिडी सिलेंडर के दाम बढ़ने के बाद तीन किलो और पांच किलो के सिलेंडर में गैस भरना भी महंगा हो गया था। मगर अब गैस आपूर्ति ठप होने के बाद छोटे सिलेंडर भी महंगे हो गए हैं। अमूमन 125 से 150 रुपये प्रति किलो के हिसाब से भरे जाने वाले सिलेंडर अब 200 से 250 रुपये प्रति किलो के हिसाब से भरे जा रहे हैं।
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