आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भरणे ने बताया कि जांच में निवेशकों से प्राप्त रकम के वास्तविक स्रोत और उसके गंतव्य का पता लगाने पर जोर है। इसके लिए अलग-अलग बैंक खातों के स्टेटमेंट, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और नकद लेन-देन की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। क्रिप्टोकरेंसी और डॉलर के माध्यम से किए गए लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है।
जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाना अहम है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम किन खातों में पहुंची, वहां से किन माध्यमों से आगे भेजी गई और विदेश में बैठे मुख्य आरोपी तक इसका कितना हिस्सा पहुंचा। हवाला के संभावित इस्तेमाल और विदेश में धनराशि भेजे जाने से जुड़े पहलुओं को भी वित्तीय जांच के दायरे में रखा गया है। हालांकि, एसटीएफ की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में हवाला के जरिये भेजी गई रकम की मात्रा, संबंधित व्यक्तियों या किसी विशिष्ट लेन-देन का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
पूरे मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण कड़ी निवेशकों से जुटाई गई रकम का अंतिम गंतव्य है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि रकम किन-किन खातों और माध्यमों से गुजरकर विदेश पहुंची। इसके साथ ही लविश चौधरी के सहयोगियों, नेटवर्क के शीर्ष पदों पर रहे लोगों और अलग-अलग कंपनियों के जरिये निवेश जुटाने वालों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एसटीएफ और ईडी की वित्तीय जांच से इस नेटवर्क के आर्थिक ढांचे, विदेशों में संभावित संपत्तियों और धन के लेन-देन की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।