फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंडः एक अरब से ज्यादा के छात्रवृत्ति घोटाले में जांच के आदेश

Fri, 17 Mar 2017 10:00 AM IST
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
छात्रवृत्ति घोटाला - फोटो : demo pic
विज्ञापन
राज्य में फर्जी दाखिले दिखाकर छात्रवृत्ति के पैसे हड़पने के मामले में खुली जांच के लिए मुख्य सचिव ने विजिलेंस को अनुमति दे दी है।
विज्ञापन


ऐसा तब संभव हुआ, जब सरकार बदल गई, वरना अनुमति की फाइल तीन माह से गृह विभाग में धूल फांक रही थी। इस मामले में अब नवनियुक्त मुख्यमंत्री की अनुमति मिलते ही एफआईआर दर्ज की जाएगी। माना जा रहा है कि पूरा घपला एक अरब रुपये से भी ज्यादा के सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़ा है। इसमें जिला स्तर से लेकर शासन में तैनात अधिकारियों तक के फंसने का अनुमान है।

बेरोजगारी भत्ते के अलावा पेंशन समेत तमाम लुभावने तरीकों से एससी-एसटी छात्रों के प्रमाणपत्र हासिल करके निजी कालेज संचालकों ने उनके व्यावसायिक कोर्स में पहले फर्जी दाखिले दिखाए। इसके बाद समाज कल्याण विभाग से मिलकर इन कोर्सों के लिए सरकार की ओर से मिलने वाली छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि को अपने खातों में ट्रांसफर करा लिया। नियमानुसार यह पैसा छात्रों के खातों में जाना चाहिए था।
विज्ञापन


समाज कल्याण विभाग की मिलीभगत इसी से स्पष्ट हो जाती है कि छात्रवृत्ति या प्रतिपूर्ति का पैसा दाखिले के सत्यापन के बाद दिया जाता है, मगर यहां सत्यापन किया ही नहीं गया। हैरानी की बात यह है कि इस राशि को हड़पने में केवल उत्तराखंड ही नहीं यूपी समेत अन्य प्रदेशों के कॉलेज संचालक भी पीछे नहीं रहे।

वहां भी उत्तराखंडी छात्र-छात्राओं के दाखिले दिखाकर पैसा हजम किया गया। इसके अलावा दूसरे राज्यों के छात्रों को उत्तराखंड में दाखिला लेने पर भी छात्रवृत्ति दी गई। आंख मूंदकर मची इस लूट में करीब सौ करोड़ रुपये से ज्यादा का खेल किया गया। मामले का खुलासा एक शिकायत के बाद हुआ, जिसकी गंभीरता से जांच करवाकर कार्रवाई करने के बजाय लीपापोती कर दी गई। बाद में यह प्रकरण विजिलेंस को सौंपा गया।

विजिलेंस ने प्राथमिक जांच में शिकायत में मौजूद ज्यादातर तथ्य सही पाते हुए शासन से खुली जांच करने की अनुमति मांगी। तीन माह बीतने के बाद आखिरकार मामला मुख्य सचिव एस. रामास्वामी के पास पहुंचा तो उन्होंने अनुमति प्रदान करके फाइल मुख्यमंत्री को भेज दी है। मुख्यमंत्री स्तर से अनुमति के बाद विजिलेंस मामले में एफआईआर दर्ज करके आगे की कार्रवाई करेगी। 
विज्ञापन


सूचना आयुक्त ने भी दिए थे एफआईआर के आदेश
इस गंभीर मामले में कुछ आरटीआई कार्यकर्ताओं ने सूचना आयुक्त के यहां अपील की थी। वहां से भी दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके कार्रवाई करने का आदेश दिया गया, मगर गृह विभाग इस पर चुप्पी साधकर बैठा रहा। इधर, जब सरकार बदली, तब जाकर मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें