गंगा संरक्षण के लिए 26 बिंदुओं पर जारी हाइकोर्ट के आदेश पर प्रगति रिपोर्ट के साथ हाइकोर्ट में शुक्रवार को प्रदेश के सभी जिलाधिकारी कोर्ट में उपस्थित होंगे। कोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि आदेश का पालन नहीं होता है तो सभी जिलाधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी किया जा सकता है।
अधिवक्ता ललित मिगलानी ने हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई के बाद हाइकोर्ट ने दो दिसंबर 2016 को 26 बिंदुओं पर आदेश पारित कर केंद्र सरकार को गंगा संरक्षण के लिए विशेष कानून बनाने और गंगा के उद्गम से गंगा सागर तक के पांच राज्यों के लिए तीन माह में अंतरराष्ट्रीय परिषद का गठन करने का आदेश जारी किया था।
कोर्ट ने कैग को भी आदेश दिया था कि गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए जारी राशि का ऑडिट कर राष्ट्रपति के समक्ष पेश करे। इसके साथ उत्तराखंड में एक जनवरी से प्लास्टिक कैरी बैग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का आदेश भी कोर्ट ने दिया था।
कोर्ट ने केंद्र को नदी संरक्षण क्षेत्र बनाकर निर्माण प्रतिबंधित करने और गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए नेशनल वाटर रिसोर्स डेवलपमेंट काउंसिल का गठन करने का भी आदेश दिया था। कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह भी आदेशित किया था कि वह नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के लिए बनी डीपीआर की धनराशि 266 करोड़ में से उत्तराखंड स्टेट प्रोग्राम मैनेजमेंट ग्रुप को उसका हिस्सा अवमुक्त करे।