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सतर्कता ने भी शुरू की एडीबी में हुए 2.23 करोड़ के घोटाले की जांच

Fri, 14 Oct 2016 06:48 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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लोक निर्माण विभाग की एडीबी विंग में हुए 2.23 करोड़ रुपये घोटाले की जांच सतर्कता विभाग भी करेगा।
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मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित सतर्कता विभाग ने भी इस घोटाले का संज्ञान लिया है। इस पर सतर्कता विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। लोक निर्माण विभाग भी मामले में आरोप पत्र जारी कर चुका है। आरोपियों के जवाब न भेजने पर रिमाइंडर भेजा गया है।

निगरानी समिति के निर्देश पर सतर्कता विभाग ने मामले का संज्ञान लेकर जांच शुरू की है। इस संबंध में सतर्कता विभाग ने लोक निर्माण विभाग को पत्र भेजकर अवगत कराया है।
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इसमें कहा गया है कि एडीबी  के तत्कालीन परियोजना निदेशक ने अपने अधीनस्थों पर अनुचित दबाव बनाया। इससे वित्तीय अनियमितता हुई है। शासन ने लोक निर्माण विभागाध्यक्ष प्रमुख अभियंता एचके उप्रेती से मामले की जांच पहले ही शुरू करवा दी थी।

दोषी अभियंताओं को आरोप पत्र जारी हुए तकरीबन डेढ़ महीने बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक उनका जवाब नहीं आया है। इस पर विभाग की ओर से रिमाइंडर जारी किया गया है। आरोप पत्रों का जवाब आने के बाद अगली कार्रवाई तय की जाएगी। इस घोटाले की शिकायत विभाग के सेवा निवृत्त मुख्य अभियंता एके बिष्ट ने की थी। विशेष लेखा जांच में भी वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई थी।

यह मामला वर्ष 2009 का है। इसमें रुड़की की पिरान कलियर-मुजाहिदपुर-सत्तीवाला, रुहाल्की-सहदेवपुर और रायसी शाहपुर मोटर मार्ग के निर्माण नियमों का उल्लंघन करके घन मीटर की जगह वर्ग मीटर टेंडर आमंत्रित किए। इससे निर्माण की दर बढ़ गई।
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पहले यह मामला दबा दिया गया। हाल में इस प्रकरण में लोक निर्माण विभाग के सचिव डीएस गर्ब्याल ने मामले की फिर फाइल खुलवाकर नए सिरे जांच शुरू कराई। शासन की निगरानी समिति के निर्देश पर सतर्कता विभाग ने अलग से जांच शुरू की है।
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