उत्तराखंड में भाजपा किसका चेहरा आगे करके चुनाव लड़ेगी? मुख्यमंत्री कौन बनेगा? चुनाव नजदीक आते ही ये सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की भूमिका पर भी कयास लग रहे हैं।
निशंक के समर्थक एक बार फिर प्रदेश की सियासत में उनकी अहम भूमिका तय करने की पैरवी कर रहे हैं। लेकिन यह भी एक हकीकत है कि अपने मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान निशंक को विपक्षी दल से ज्यादा विरोध अपनों का ही झेलना पड़ा था। उनके फैसलों पर सवाल उठे और घोटालों का इल्जाम भी लगा।
निशंक खुद अपनी भूमिका के बारे में क्या सोचते हैं? हरदा फैक्टर को लेकर उनकी क्या सोच है? हरीश रावत और कांग्रेस का भाजपा कैसे मुकाबला करेगी? भाजपा की प्रदेश राजनीति ने क्या रुख पकड़ा है, इन्हीं सब सवालों पर उन्होंने अमर उजाला के मुख्य संवाददाता कृष्णेंदु कुमार से क्या कहा, आप भी जानिए...
मुख्यमंत्री के रूप में आपके कार्यकाल में कई घोटालों के आरोप लगाए जाते हैं?
- मुझ पर दूर-दूर तक कभी कोई आरोप नहीं रहा। मेरे खिलाफ तो कुछ था नहीं। जिन्होंने ऐसा माहौल बनाया वो हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गए, जनहित याचिका भी दाखिल की, लेकिन उनकी याचिका खारिज हो गई। इससे बड़ी बात कुछ नहीं हो सकती। मैंने जब प्रेस कांफ्रेंस करके कहा कि मैं आरोप लगाने के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराऊंगा तो कांग्रेस ने तत्काल अपनी बात वापस ले ली और कहा कि हमने तो ऐसे आरोप लगाए ही नहीं हैं।
आप जब प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तो आपका विरोध विपक्ष ज्यादा आपके सगों ने किया। आपके कुर्सी छोड़ने की वजह भी अपने ही रहे। आखिर इसकी वजह क्या रही?
- देखिए, मैं यंग ऐज में उत्तर प्रदेश में दो-दो बार मंत्री रहा। उत्तराखंड में भी यंग ऐज में मंत्री रहा। यंग ऐज में ही मैं प्रदेश का मुख्यमंत्री भी हो गया। ऐसे में थोड़ा बहुत विरोध स्वाभाविक है।
2012 के विधानसभा चुनावों में आप पर भी भाजपा प्रत्याशियों को पूरा सहयोग नहीं करने का आरोप है ?
- मुझे तो लगता है कि किसी ने ऐसी बात कही नहीं होगी। अगर कहा भी होगा तो अज्ञानता में कहा होगा। मैंने तो कभी ग्राम प्रधान बनने के बारे में भी नहीं सोचा था। जिस पार्टी ने मुझ जैसे सामान्य व्यक्ति को उत्तर प्रदेश जैसे राज्य का दो-दो बार कैबिनेट मंत्री बनाया। उत्तराखंड में पहले कैबिनेट मंत्री फिर मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद पार्टी ने मुझे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बनाया। उस पार्टी का अहित तो मैं सपने में भी नहीं सोच सकता। लेकिन हां, जिन्होंने पार्टी को अपने अहम के चलते नुकसान पहुंचाने की कोशिश की उनके खिलाफ मेरा अभियान रहा। पार्टी को जिसने भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है, उसको मैंने कभी बर्दाश्त नहीं किया है। यह बात मैं प्रमाणिक तरीके कहता हूं कि दूर-दूर तक मुझ पर कोई उंगली नहीं उठा सकता।
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