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'मानहानि की बात पर उत्तराखंड में कांग्रेस हुई बैक स्टेप' वीडियो में देखें, निशंक से सीधी बात

Sun, 28 Aug 2016 06:30 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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रमेश पोखरियाल निशंक - फोटो : file photo
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उत्तराखंड में भाजपा किसका चेहरा आगे करके चुनाव लड़ेगी? मुख्यमंत्री कौन बनेगा? चुनाव नजदीक आते ही ये सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की भूमिका पर भी कयास लग रहे हैं।
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निशंक के समर्थक एक बार फिर प्रदेश की सियासत में उनकी अहम भूमिका तय करने की पैरवी कर रहे हैं। लेकिन यह भी एक हकीकत है कि अपने मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान निशंक को विपक्षी दल से ज्यादा विरोध अपनों का ही झेलना पड़ा था। उनके फैसलों पर सवाल उठे और घोटालों का इल्जाम भी लगा।

निशंक खुद अपनी भूमिका के बारे में क्या सोचते हैं? हरदा फैक्टर को लेकर उनकी क्या सोच है? हरीश रावत और कांग्रेस का भाजपा कैसे मुकाबला करेगी? भाजपा की प्रदेश राजनीति ने क्या रुख पकड़ा है, इन्हीं सब सवालों पर उन्होंने अमर उजाला के मुख्य संवाददाता कृष्णेंदु कुमार से क्या कहा, आप भी जानिए...
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मुख्यमंत्री के रूप में आपके कार्यकाल में कई घोटालों के आरोप लगाए जाते हैं? 
- मुझ पर दूर-दूर तक कभी कोई आरोप नहीं रहा। मेरे खिलाफ तो कुछ था नहीं। जिन्होंने ऐसा माहौल बनाया वो हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गए, जनहित याचिका भी दाखिल की, लेकिन उनकी याचिका खारिज हो गई। इससे बड़ी बात कुछ नहीं हो सकती। मैंने जब प्रेस कांफ्रेंस करके कहा कि मैं आरोप लगाने के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराऊंगा तो कांग्रेस ने तत्काल अपनी बात वापस ले ली और कहा कि हमने तो ऐसे आरोप लगाए ही नहीं हैं। 

आप जब प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तो आपका विरोध विपक्ष ज्यादा आपके सगों ने किया। आपके कुर्सी छोड़ने की वजह भी अपने ही रहे। आखिर इसकी वजह क्या रही?
- देखिए, मैं यंग ऐज में उत्तर प्रदेश में दो-दो बार मंत्री रहा। उत्तराखंड में भी यंग ऐज में मंत्री रहा। यंग ऐज में ही मैं प्रदेश का मुख्यमंत्री भी हो गया। ऐसे में थोड़ा बहुत विरोध स्वाभाविक है।

2012 के विधानसभा चुनावों में आप पर भी भाजपा प्रत्याशियों को पूरा सहयोग नहीं करने का आरोप है ? 
- मुझे तो लगता है कि किसी ने ऐसी बात कही नहीं होगी। अगर कहा भी होगा तो अज्ञानता में कहा होगा। मैंने तो कभी ग्राम प्रधान बनने के बारे में भी नहीं सोचा था। जिस पार्टी ने मुझ जैसे सामान्य व्यक्ति को उत्तर प्रदेश जैसे राज्य का दो-दो बार कैबिनेट मंत्री बनाया। उत्तराखंड में पहले कैबिनेट मंत्री फिर मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद पार्टी ने मुझे राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बनाया। उस पार्टी का अहित तो मैं सपने में भी नहीं सोच सकता। लेकिन हां, जिन्होंने पार्टी को अपने अहम के चलते नुकसान पहुंचाने की कोशिश की उनके खिलाफ मेरा अभियान रहा। पार्टी को जिसने भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है, उसको मैंने कभी बर्दाश्त नहीं किया है। यह बात मैं प्रमाणिक तरीके कहता हूं कि दूर-दूर तक मुझ पर कोई उंगली नहीं उठा सकता।

वीडियो में देखें इंटरव्यू...

हमारे यहां जबरदस्ती काम नहीं होता

- फोटो : अमर उजाला
आपके बारे में यह भी कहा जाता है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी आपको टिकट नहीं देना चाहती थी। स्वामी रामदेव के हस्तक्षेप के बाद आपको हरिद्वार से लोकसभा का टिकट मिला।
- देखिए, स्वामी रामदेव जी चाहते थे कि मैं चुनाव लड़ूं, लेकिन मैंने पार्टी से बात की थी कि यदि मुझे प्रदेश में रहना है तो मेरी क्या भूमिका होगी? और यदि प्रदेश में मेरी भूमिका तय नहीं हो रही तो फिर मैं लोकसभा में जाऊं। हरिद्वार की सीट काफी अहम थी। पार्टी की संसदीय बोर्ड ने मुझे टिकट दिया था। दो लाख मतों से मैं जीता। इससे ही पता चलता है कि हरिद्वार के लोगों का मुझ पर कितना भरोसा है।  

लोकसभा का चुनाव तो आप भारी बहुमत से जीत गए, लेकिन विधानसभा की जो सीट आपने खाली की वहां से पार्टी उप चुनाव में क्यों हार गई?  
- लोकसभा के चुनाव में और उप चुनाव में थोड़ा फर्क होता है। यूपी में हुए उप चुनाव में पार्टी 11 में से 08 सीटों पर चुनाव हार गई। उप चुनाव में भाजपा के  प्रत्याशी त्रिवेंद्र सिंह रावत को मेरे मुकाबले पांच हजार मत अधिक मिले थे। हमारा मत प्रतिशत को बढ़ा था। लेकिन सारे विरोधी कांग्रेस के पक्ष में इकट्ठे हो गए थे। इस वजह से पार्टी को उप चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। 

अब जब प्रदेश में विधानसभा का चुनाव होने वाला है। आप इसमें अपनी भूमिका किस प्रकार देखते हैं? 
- हमारी कोशिश तो प्रदेश में भाजपा की सरकार लाने की होगी। इसमें मेरी क्या भूमिका होगी? यह तो पार्टी तय करेगी। पार्टी ने मुझे जो भी काम सौंपा उसका मैंने रिजल्ट दिया है।

18 मार्च के प्रकरण से लेकर राज्यसभा के चुनाव तक पार्टी में आपकी भूमिका कुछ खास नजर नहीं आई, क्या कमान भगत सिंह कोश्यारी के हाथ में थी, इस वजह से आप चुपचाप घर बैठे रहे ? 
- हमारे यहां पार्टी तय करती है कि किसको क्या काम करना है। हमारे यहां जबरदस्ती काम नहीं होता है। पार्टी ने जिन-जिन लोगों को जिम्मेदारी सौंपी होगी उन्होंने काम किया। पार्टी ने मुझे जो जिम्मेदारी सौंपी होगी, उसको मैंने निभाया होगा। जहां तक फायदे नुकसान का सवाल है वह तो आपके सामने है। 
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हरीश रावत से मेरी व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है

पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक - फोटो : amar ujala
विजय बहुगुणा और हरक सिंह रावत के खिलाफ तो आपने मोर्चा खोल रखा था, अब आप उन्हें कैसे पचा पाएंगे?
- पार्टी ने नुकसान के लिए तो कोई कदम उठाया नहीं है। मैंने अपने राजनीतिक जीवन में किसी के खिलाफ कोई व्यक्तिगत आरोप नहीं लगाया है। मुझे जो गलत लगता है, उसके खिलाफ आवाज उठाता हूं। बदली हुई परिस्थितियों में भी मुझसे समीक्षा करने को कहा जाए तो मैं तो यहीं कहूंगा जो गलत है वो गलत है। 

सुना है, कांग्रेस से भाजपा में आए नौ पूर्व विधायकों को लेकर पार्टी में बगावत की स्थिति बन रही है?
- देखिए, हमारी पार्टी में लोकतंत्र है। सबको अपनी बात कहने का हक है। एक आदमी की पार्टी नहीं है भाजपा। कई लोग सिर्फ मुझसे ही नहीं, भगत दा से भी मिले थे, दिल्ली में जाकर भी मुलाकात की थी। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है। अपनी भावनाओं को लेकर कुछ लोग मिले थे, वो उनकी भावनाएं हैं। 

प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत के प्रति साफ्ट कार्नर रखने का भी आप पर आरोप है? 
- मेरी हरीश रावत से व्यक्तिगत दुश्मनी कब रही है? किसी से भी मेरी व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं रही है। इस राज्य में हर पार्टी के हर व्यक्ति से मेरी दोस्ती है, दुश्मनी नहीं। जब मैं उत्तर प्रदेश में रहा हूं तो वहां भी सभी राजनीतिक दलों के लोगों से मेरी दोस्ती थी। लेकिन मैंने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। यूपी में तो मैंने 14-14 दलों के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश पुनर्गठन एक्ट पारित कराया था। मैं गरीब परिवार से ताल्लुक रखता हूं, मैंने कभी गलत लोगों से समझौता नहीं किया। 
 
हरीश रावत के कार्यकाल को आप किस नजरिए से देखते हैं? 
- देखिए, जादू की छड़ी तो किसी के पास होती नहीं, लेकिन हरीश रावत से जितनी अपेक्षाएं थीं उसको वे पूरा नहीं कर पाए। वो जितना कर सकते थे उतना नहीं कर पाए। कुर्सी बचाने के चक्कर में वे राज्य को नहीं बचा पाए। कुर्सी तो उन्होंने बचा ली, लेकिन राज्य उनके हाथ से निकल गया। राज्य बहुत पीछे चला गया है। मुख्यमंत्री विकास के मनगढ़ंत आंकड़े प्रस्तुत कर रहे हैं। इसका परिणाम 2017 के विधानसभा चुनावों में सामने आ जाएगा। 

2017 के चुनावों के लिए पार्टी को अपना चेहरा घोषित कर देना चाहिए था, इतना सन्नाटा क्यों है?  
- यह फैसला तो पार्टी करेगी। लेकिन बात तो यह है कि 2017 में भाजपा की सरकार आने वाली है। प्रदेश के लोगों ने भाजपा का काम देखा है।
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