सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो पाएंगे कि पहाड़ के तीन हजार ग्राम पंचायतों में इंटरनेट सुविधा ही नहीं है। ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर केबल से नहीं जोड़ा गया है। इसलिए नेट बैंकिंग तो यहां पर लगभग नामुमकिन ही है। इसके अलावा भी पर्वतीय अंचल में नेट की स्थिति औसत दर्जे से भी नीचे है।
फिर पर्वतीय अंचल में बैंकों की शाखाएं बेहद सीमित हैं। उत्तराखंड में पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीनों की संख्या बहुत कम है। व्यापारिक प्रतिष्ठानों के अनुपात में इनकी संख्या बेहद सीमित है। बेहद कमजोर आर्थिक वर्ग और बिना बैंक खातों वाले लोगों के लिए माइक्रो एटीएम की संख्या भी ना के बराबर है।
सूचना प्रौद्योगिकी सचिव दीपक कुमार का कहना है कि कैशलैस अर्थव्यवस्था को मूर्त रूप देने में समय लगेगा। पर्वतीय इलाकों में सबसे बड़ी चुनौती नेट कनेक्टिविटी है। इसलिए आईटी का बुनियादी ढांचा मुहैया कराना एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए मंत्रालय को वस्तुस्थिति रिपोर्ट भेजी गई है। कुछ समय लगेगा लेकिन हालात बेहतर हो सकेंगे। अपर सचिव (वित्त) श्रीधर बाबू अदांकी का कहना है कि कैशलैस अर्थव्यवस्था के लिए हम हर वर्ग के हिसाब से रणनीति बनाकर काम कर रहे हैं।