डा. शैलेष ने ऐसी तकनीक को पेटेंट कराया है जो न केवल लिथियम आयन बैटरी के जीवन को 20 साल के लिए बढ़ाती है। बैटरी की भंडारण क्षमता और शक्ति में भी सुधार करती है। इसे सौर ऊर्चा को स्टोर करने के साथ बिजली से चलने वाली कारों, ट्रकों और बस चलाने में इस्तेमाल किया जा सकता है।
उनकी कंपनी करीब दो सौ लोगों को रोजगार भी दे रही है। डा. उप्रेती की प्रारंभिक शिक्षा मनान, उच्च शिक्षा एसएसजे परिसर से हुई। एमएससी रसायन में गोल्ड मेडलिस्ट डा. उप्रेती ने इसके बाद आईआईटी दिल्ली से पीएचडी की उपाधि ली।
उनका फरवरी 2007 में अमेरिका में फैलोशिप के लिए चयन हो गया। डा. उप्रेती को पहाड़ से काफी लगाव है। उन्होंने बेड़ू पाको डॉट कॉम नाम से वेबसाइट भी बनाई है, जो उनके पहाड़ प्रेम को दर्शाती है।