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International Yoga Day: सरकारी नौकरी नहीं मिली तो आत्मनिर्भर बन रहे युवा, समाज को दे रहे स्वस्थ जीवन का संदेश

Sun, 21 Jun 2026 02:16 PM IST
Alka Tyagi बिशन सिंह बोरा, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

Dehradun News: प्रदेश के कई युवा अपने प्रशिक्षण और अनुभव के दम पर नए अवसर सृजित कर रहे हैं।
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योग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर उत्तराखंड के प्रशिक्षित योगाचार्य न केवल योग की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं, बल्कि स्वरोजगार के माध्यम से समाज को स्वस्थ जीवन का संदेश भी दे रहे हैं। प्रदेश के कई युवा अपने प्रशिक्षण और अनुभव के दम पर नए अवसर सृजित कर रहे हैं।

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सहस्त्रधारा रोड निवासी कीर्ति ने ऑनलाइन योग प्रशिक्षण केंद्र शुरू कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। वहीं, सीमाद्वार की रीना नौटियाल घर-घर जाकर बच्चों और बुजुर्गों को योग सिखा रही हैं। उनका कहना है कि बदलती जीवनशैली में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

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शरीर, मन और जीवनशैली के बीच संतुलन स्थापित करता है योग

गांधी पार्क में पिछले 15 साल से मुफ्त योगा सीखा रही गीता वर्मा बताती हैं कि हर सुबह वॉक के लिए यहां आती थी। तब अन्य लोगों को योग करते देखा तो उन्हें भी लगा कि उन्हें करना चाहिए। योग सीखने के बाद वह अन्य लोगों को नियमित रूप से सीखा रहीं हैं। क्लेमेंटाउन निवासी रंजिता राणा के मुताबिक सहारनपुर अपने घर के पास योग की कक्षाएं चलती थी, वहीं से उन्होंने इसे सीखा। वह बताती हैं कि बढ़ता तनाव, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक गतिविधियों में कमी लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल रही है। ऐसे समय में योग एक प्रभावी और सरल माध्यम है। योग के नियमित अभ्यास से एकाग्रता, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास में भी सुधार देखा जाता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी आयु वर्ग के लोग अपनी क्षमता के अनुसार योग को दिनचर्या का हिस्सा बना सकते हैं।

योग प्रशिक्षित बेरोजगारों को नहीं मिली नाैकरी

योग प्रशिक्षित बेरोजगारों के मुताबिक योग को देश और दुनिया में प्रसिद्धि दिलाने वाले प्रदेश में हजारों योग प्रशिक्षित बेरोजगार हैं। कुछ वर्षों से सरकारी नौकरी की राह देख रहे हैं तो कुछ ने अपने योग प्रशिक्षण केंद्र शुरु कर दिए हैं। उनके मुताबिक 31 दिसंबर 2021 में राज्य सरकार की कैबिनेट में प्रस्ताव पारित किया गया था कि प्रत्येक जिले के एक सरकारी इंटर कॉलेजों में योग प्रशिक्षितों को रोजगार दिया जाएगा। वहीं, राजकीय महाविद्यालयों में भी उनकी तैनाती की जाएगी। इंटर कॉलेजों में नियुक्ति के लिए दो बार शासनादेश जारी किए गए। 22 फरवरी 2025 को जारी पहले शासनादेश में कहा गया कि योग प्रशिक्षितों के पद 28 फरवरी 2025 तक के लिए स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन गलत शासनादेश होने की वजह से विभाग ने नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं की।

इसके बाद 11 अप्रैल 2025 को दूसरा शासनादेश जारी किया गया। इसमें पद 28 फरवरी 2026 तक के लिए स्वीकृत किए गए, लेकिन बेरोजगारों को दूसरी बार के शासनादेश के बाद भी नियुक्ति नहीं मिली। योग प्रशिक्षित युवाओं का कहना है कि सरकार की ओर से कई बार रोजगार देने की घोषणाएं और आश्वासन मिले, लेकिन धरातल पर नियुक्तियां नहीं हो पाईं है। योग शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमित नेगी ने बताया कि राज्य में 65 हजार से ज्यादा प्रशिक्षित बेरोजगार हैं। भानियावाला निवासी मधु डोभाल और उत्तरकाशी निवासी नीरज डिमरी बताते हैं कि वर्ष 2023 में कुछ बेरोजगारों को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में तैनाती मिली, लेकिन उन लोगों को बहुत कम मानदेय पर रखा गया है।
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