उनका कहना है कि श्रीमद्भगवद्गीता के सभी 18 अध्यायों में भगवान कृष्ण ने योग के महत्व का वर्णन किया है। गीता में कहा गया है कि योगी वह नहीं जो अत्यधिक खाता, सोता या बोलता है, बल्कि वह है जो जीवन में संतुलन बनाए रखता है। समय पर भोजन, समय पर विश्राम और नियमित दिनचर्या ही योग का मूल आधार है। भगवान का यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना हजारों वर्ष पहले था।
योग विशेषज्ञ हरि प्रसाद ममगाईं का मानना है कि योग को केवल एक दिवस तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चमोली जिले के प्रमुख तीर्थ और पर्यटन स्थलों पर योग केंद्र एवं योग स्थल विकसित किए जाने चाहिए।
इससे न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। हिमालय की गोद में बसे बदरीनाथ धाम और पंच बदरी के मंदिर आज भी यह संदेश दे रहे हैं कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा को जोड़ने वाली जीवन पद्धति है।