नर्स ही नहीं मना पातीं नर्स दिवस
उत्तराखंड नर्सेज सर्विसेज एसोसिएशन की जिला महामंत्री वीर कौर सैनी ने बताया कि किसी भी अस्पताल में मानक के अनुरूप नर्स नहीं है। वहीं, संविदा पर कार्यरत नर्सों का वेतन भी बहुत कम रहता है। बताया कि पहले वह दून अस्पताल में नर्स थीं, लेकिन अब डीजी ऑफिस में वेतन बनाने का काम दे दिया गया है। हमारा काम ही हमसे छीन लिया गया, ऐसे में नर्सिंग दिवस मनाएं तो कैसे?
नर्स तो अस्पताल की रीढ़ होती हैं। नर्स को हर समय मरीज के साथ रहना होता है। कम वेतन और अधिक काम के बोझ के कारण कई नर्स नौकरी छोड़ देती हैं। ऐसे में बचे स्टाफ पर काम का और ज्यादा बोझ आ जाता है। - मुकेश सिंह, नर्सिंग ऑफिसर, दूून अस्पताल
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हमारी सैलरी 13 हजार है, लेकिन हम अपना काम पूरी ईमानदारी और मेहनत से करते हैं। मरीज के इलाज में कोई लापरवाही न हो इसका ख्याल रखते हैं। - रजनी नेगी, स्टाफ नर्स, दून अस्पताल
मरीज के इलाज में डॉक्टर की तरह नर्स का भी अहम रोल होता है। डॉक्टर मरीज का इलाज करता है और नर्स भर्ती के बाद मरीज की देखभाल। दवाओं से लेकर मरीज के खानपान का ध्यान नर्स ही रखती हैं। - अनामिका कश्यप, स्टाफ नर्स, दून अस्पताल