भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के क्षेत्रीय प्रभारी व वनस्पति विज्ञानी डॉ. एसके सिंह के मुताबिक भारत में वनस्पतियों की 60000 से अधिक प्रजातियां हैं। इसमें 18500 फूल वाले पौधों के साथ ही 14000 फंगस और 1200 के करीब फर्न की प्रजातियां हैं। ब्रायोफिट्स की संख्या 250 के आसपास है। लेकिन 40 फीसदी प्रजातियों पर संकट मंडरा रहा है। पर्यावरण में आए बदलाव और वनों के अत्यधिक दोहन से जैव विविधता प्रभावित हो रही है।
संरक्षण के लिए चल रहे कई कार्यक्रम
कस्तूरी मृग, स्नो लेपर्ड और बाघों के संरक्षण के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। कस्तूरी मृग के संरक्षण के लिए महरूड़ी में कस्तूरी मृग अनुसंधान केंद्र के साथ ही चमोली के कंचला में कस्तूरी मृग फार्म स्थापित किया गया है। पिथौरागढ़ के अस्कोट में भी कस्तूरी मृग अभ्यारण की स्थापना की गई है। वहीं, वर्ष 1990 से ही स्नो लेपर्ड योजना के साथ टाइगर वाच योजना चल रही है।
राज्य में बनेंगी 10 बायो डायवर्सिटी हेरिटेज साइट्स
राज्य सरकार, वन विभाग और जैव विविधता बोर्ड की ओर से पूरे राज्य में 10 जगहों पर बायो डायवर्सिटी हेरीटेज साइट्स का निर्माण किया जाएगा। फिलहाल पहले चरण में पिथौरागढ़ के थलकेदार और टिहरी के देवलसारी क्षेत्र में जैव विविधता हेरिटेज साइट्स को बनाने की प्रक्रिया जारी है।
राज्य में जैव विविधता के संरक्षण के लिए पीपल डायवर्सिटी रजिस्टर (पीबीआर) तैयार किया जा रहा है। इसमें जैव विविधता से जुड़ी सभी प्रजातियों को शामिल किया जाएगा। बायो डायवर्सिटी मैनेजमेंट कमेटी (बीएमसी) की मदद से पीबीआर तैयार करने के बाद जैव विविधता के संरक्षण को लेकर तमाम योजनाएं बनाई जाएंगी।
-विनोद सिंघल, अध्यक्ष, उत्तराखंड जैव विविधता संरक्षण बोर्ड
सरकार, जैव विविधता बोर्ड और वन विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। जैव विविधता को संरक्षित करने में आमजन की अधिक से अधिक भागीदारी हो इस पर भी काम किया जा रहा है। जैव विविधता को संरक्षित करने को लेकर हर संभव कदम उठाए गए हैं।
-राजीव भरतरी, प्रमुख वन संरक्षक, उत्तराखंड