अभी तक हाकिम का जलवा रहता था। उनके इशारों के कई-कई मतलब निकाल कर मातहत काम पर जुट जाते थे। लेकिन खाद्य सुरक्षा योजना के चक्कर में पहिया उलटा घूमने लगा।
योजना के काम का बोझ देखकर भी मातहत मस्त रहे। नतीजा-नौ दिन चले अढ़ाई कोस। मातहतों ने हाकिम के इशारे का क्या डांट का भी कोई मतलब नहीं निकाला, सब मस्त रहे। काम का पहाड़ सामने है।
अब हाकिम कह रहे हैं कि चना भले ही न फोड़ पाया हो लेकिन वह अकेले ही ‘भाड़’ फोड़ेंगे।