-उत्तराखंड फार्मेसी काउंसिल ने 50 से अधिक संस्थानों को जारी किए निर्देश
-इंटरमीडिएट में साइंस संकाय में अलग-अलग विषयों में उत्तीर्ण होना अनिवार्य
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। प्रदेश के कई कॉलेज व विश्वविद्यालय फार्मेसी अधिनियम के मानकों के विपरीत डीफार्मा व बीफार्मा के लिए अनिवार्य विषयों में फेल छात्रों को भी प्रवेश दे रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए उत्तराखंड फार्मेसी काउंसिल ने 50 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों को निर्देश जारी किए हैं।
उत्तराखंड फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार केएस फरस्वाण ने बताया कि डीफार्मा व बीफार्मा में प्रवेश के लिए इंटरमीडिएट में विज्ञान संकाय में अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान व गणित विषयों में अलग-अलग उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। कई संस्थान फार्मेसी अधिनियम के विपरीत अनिवार्य विषयों में फेल छात्रों को भी डीफार्मा व बीफार्मा में प्रवेश दे रहे हैं।
द्विवर्षीय डिप्लोमा व चार वर्षीय डिग्री उत्तीर्ण कर छात्र-छात्राएं पंजीकरण कराने के लिए उत्तराखंड फार्मेसी काउंसिल में आते हैं। अनिवार्य विषयों में उत्तीर्ण न होने के कारण उनका पंजीकरण नहीं हो पाता है, जिससे छात्रों का भविष्य खराब हो रहा है। साथ ही आर्थिक नुकसान होता है। इस तरह प्रकरण में कई छात्रों हाईकोर्ट नैनीताल में याचिका दायर की है।
रजिस्ट्रार ने बीफार्मा व डीफार्मा कोर्स कराने वाले संस्थानों को पत्र जारी कर निर्देश दिए कि प्रवेश देते समय छात्र-छात्राओं के सभी दस्तावेजों को भलीभांति जांच लें। इंटरमीडिएट में विज्ञान संकाय में अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान व गणित विषयों में उत्तीर्ण नहीं है तो उन्हें प्रवेश नहीं दिया जाए। भविष्य में इस तरह गलत प्रवेश देने पर संस्थान स्वयं जिम्मेदार होंगे।