दून विश्वविद्यालय में इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन जियोमॉर्फोलॉजिस्ट्स यंग जियोमॉर्फोलॉजिस्ट्स फोरम (आईजीआई-वाईजीएफ) के पांचवें संस्करण का आयोजन किया गया। पांच दिवसीय इस कार्यक्रम में देश के 14 विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।
विवि के भूगोल विभाग और भूविज्ञान विभाग की ओर से आयोजित इस गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागी एडवांस्ड मैपिंग तकनीकी की बारीकियां समझेंगे। कार्यक्रम में दिल्ली विवि, जवाहरलाल नेहरू विवि, कलकत्ता विवि, इलाहाबाद विवि समेत अन्य विवि के कुल 33 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। देशभर के 20 विषय विशेषज्ञ प्रतिभागियों को इस विधा का प्रशिक्षण भी देंगे। दून विवि की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने बताया, हाल ही में विवि को पांच करोड़ की अनुदान राशि प्राप्त हुई है, जिससे एक अत्याधुनिक प्रयोगशाला की स्थापना की गई है। यह लैब भविष्य के शोध और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में मील का पत्थर सिद्ध होगी।
आईसीएसएसआर के सदस्य सचिव प्रो. धनंजय सिंह ने समसामयिक सामाजिक चुनौतियों के समाधान में समाज विज्ञानों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। आईजीआई के महासचिव प्रो. एआर सिद्दीकी ने आईजीआई के इतिहास और वाईजीएफ जैसे मंचों के महत्व को बताते हुए जियोमॉर्फोलॉजी के क्षेत्र में नवाचार और संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। इस मौके पर वाडिया हिमालयन भूविज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. विनीत गहलौत, प्रो. सीडी सिंह, डॉ. सुमंत्र बिस्वास, डॉ. अरिंदम चौधरी आदि मौजूद रहे।