गोपनीय जांच में भी खुलासा
यह संख्या कुल 349 दरोगाओं का लगभग 10 फीसदी है। अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि ये दरोगा केस डायरी तक लिखना नहीं जानते हैं। अक्सर व्यस्तता का दावा कर अपने साथियों और जूनियरों को पैसे देते हैं ताकि समय पर केस डायरी लिखी जा सके। विभाग की गोपनीय जांच में भी इस बात का खुलासा हुआ है। अब विजिलेंस जांच के बाद ऐसे दरोगाओं पर सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि यदि नकल की बात पुष्ट हो जाती है तो उन्हें नौकरी से हाथ भी धोना पड़ सकता है।
विभागीय अधिकारियों पर भी आ सकती है आंच
दरोगा भर्ती में कुछ विभागीय अधिकारियों पर भी आंच आ सकती है। क्योंकि, बिना उनकी मिलीभगत के भर्ती में गड़बड़ी करना असंभव है। ऐसे में कुछ सेवानिवृत्त और कुछ वर्तमान अधिकारी भी इसकी जद में आ सकते हैं। हालांकि, अभी जांच शुरू होने में वक्त है। ऐसे में परिणाम क्या होंगे यह भी वक्त ही बताएगा।
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अब इस मामले की जांच विजिलेंस करेगी, लेकिन इससे पहले प्राथमिक पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इसी के चलते मैंने विजिलेंस जांच की सिफारिश की थी। जांच के बाद यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-अशोक कुमार, डीजीपी