बाबा रामदेव की कंपनी दिव्य फार्मेसी की विवादस्पद दवा दिव्य पुत्रजीवक बीज और पुत्रजीवक शिवलिंगी सीड की जांच के लिए राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। निसंतान दंपतियों के लिए फार्मेसी पुत्रजीवक दवा बेच रही है।
30 अप्रैल को संसद में विपक्ष ने दवा को पुत्र पैदा करने का इलाज बता इसे लिंगानुपात और पीएनडीटी का उल्लंघन बता जमकर हंगामा किया था। दवा पर मचा हंगामा संसद से निकल सियासी गलियारों में भी खूब गूंजा।
संसद में हुई चर्चा और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की शिकायत पर आयुष विभाग ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी है।
जनता दल (यू) राज्यसभा सांसद केसी त्यागी ने संसद में दवा को लिंग जांच के खिलाफ बताते हुए एनडीए सरकार पर संगीन आरोप लगाए थे।
बेटा पैदा करने की दवा बताकर बेचने के आरोप
दवा को पुत्र पैदा का इलाज बताकर बेचे जाने का आरोप भी दिव्य फार्मेसी पर लगा है। विपक्ष का सदन में आरोप था कि एक तरफ सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान चला रही है दूसरी तरफ ऐसी दवाएं खुलेआम बाजार में बेची जा रही हैं, जिससे शर्तिया बेटा पैदा करने का दावा जताया जा रहा है।
हालांकि विपक्ष के हमले के बाद बाबा रामदेव ने दवा का पक्ष लिया था। उन्होंने दवा को निसंतान दंपतियों के लिए बताया और कहा था कि इसका पुत्र पैदा होने से कोई संबंध नहीं है।
मामला बढ़ा तो बाबा रामदेव ने मीडिया एवं सोशल मीडिया पर आकर सफाई दी थी कि जो भी भ्रम हो रहा है वह उस दवा के नाम से पैदा हो रहा है। लेकिन इस दवा के नामकरण के लिए वे जिम्मेवार नहीं है। कहा था कि दवाओं के नाम उनके आयुर्वेदिक नाम के आधार पर रखे जाते हैं।
केंद्र से जांच के लिए आया है पत्र
केंद्र के आयुष विभाग से राज्य सरकार को दवा जांच के लिए पत्र आया था। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने ड्रग्स एवं कास्मेटिक एक्ट 1940 एवं ड्रग्स एवं मैजिक रैमिडिज (आपत्तिजनक विज्ञापन) एक्ट 1954 के तहत पीएनडीटी (लिंग चयन पर प्रतिबंध) एक्ट 1954 केतहत प्राप्त शिकायत पर दवाओं की जांच करवाई जा रही है।
यह रहेगी जांच समिति
शासन ने उत्तराखंड आयुष विभाग को इसकी जांच सौंपी गई है। जांच के लिए गठित तीन सदस्य समिति में राज्य औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी आयुष विभाग को अध्यक्ष बनाया है।
सहायक औषधि नियंत्रक आयुष विभाग और जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी हरिद्वार इसके सदस्य हैं। जांच समिति को निदेर्शित किया गया है कि दोनों दवाओं की गुणवत्ता, उत्पादकता व लाइसेंस के संबंध में विस्तृत जांच रिपोर्ट साक्ष्यों सहित 18 मई तक शासन को उपलब्ध करवाई जाए।