हरिद्वार जिले की तीन सड़कों के निर्माण में लोक निर्माण विभाग की एडीबी देहरादून यूनिट में हुए 2.23 करोड़ रुपये घपले की फाइल शासन ने फिर खुलवा दी है। इस संबंध में मंगलवार को शासन ने तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता और दो सहायक अभियंताओं के खिलाफ जांच की संस्तुति कर दी।
इस बार जांच विभागाध्यक्ष प्रमुख अभियंता एचके उप्रेती को दी गई है। इसके साथ ही कार्यदायी एजेंसी स्कॉट विल्सन प्राइवेट लिमिटेड को काली सूची में डालने की संस्तुति की गई है।
मामला वर्ष 2009 का है। पिरान कलियर-मुजाहिदपुर-सत्तीवाला, रूहांल्की-सहदेवपुर और रायसी-शाहपुर मोटर मार्ग के सीसी निर्माण में अनियमितता बरती गई।
टेंडर में बदले मानक
सूत्रों का कहना है कि विभाग ने घनमीटर में सामग्री की मात्रा तय की थी, जबकि विभागीय अधिकारियों ने घन मीटर की जगह वर्ग मीटर में टेंडर आमंत्रित कर लिए। इससे निर्माण की दर बढ़ गई। ठेकेदार को अतिरिक्त भुगतान कर दिया गया। गड़बड़ी पाए जाने पर मामले की जांच की गई, लेकिन रिपोर्ट ठंडे बस्ते में चली गई।
इसके बाद सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता एके बिष्ट ने जून, 2015 को मामले की शिकायत की। विशेष लेखा जांच में गड़बड़ी की पुष्टि हो गई, लेकिन जांच फाइलों तक ही रही। बाद में सचिव लोक निर्माण विभाग डीएस गर्ब्याल ने मामले का संज्ञान लेते हुए फाइल फिर तलब कर ली। मामले में मंगलवार को जांच के निर्देश जारी किए गए हैं।
इसमें तत्कालीन अधिशासी अभियंता एसके गुप्ता, सहायक अभियंता लाखीराम जगूड़ी और श्रीकांत शर्मा के विरुद्ध विभागाध्यक्ष उप्रेती जांच करेंगे। तत्कालीन अधीक्षण अभियंता केके जैन के संबंध में भी फिर से जांच होगी। इससे पहले जैन के समकक्ष अधिकारी ने ही जांच की थी।