करीब दो बजे घायल मासूम को भर्ती किया गया
मां बच्चे को गोद में उठाए पूरी रात अस्पताल की सीढि़यों पर बैठी रही। जैसे-तैसे सुबह हुई और मासूम की बाहर से जांचें कराई गईं। इसके बाद भी चिकित्सक बच्चे को भर्ती करने के लिए तैयार नहीं थे। परिजनों ने जब हंगामा किया तो बुधवार दोपहर करीब दो बजे घायल मासूम को भर्ती किया गया।
मासूम की बिगड़ती हालत तो कौन होता जिम्मेदार
दून अस्पताल में करीब 17 घंटे तक घायल मासूम के इलाज के लिए परिजन भटकते रहे। इस दौरान अगर बच्चे की हालत बिगड़ती तो इसका जिम्मेदार कौन होता, यह एक बड़ा सवाल है। दून अस्पताल की अव्यवस्थाओं की जब पोल खुल रही है तो अधिकारी इसे सामान्य घटना का रूप देने में जुटे हैं। जबकि, उन्हें कमियों को दूर करने की दिशा में काम करना चाहिए।
अस्पताल से इस तरह की घटना सामने आना काफी दुखद है। अस्पताल प्रबंधन ने इसका संज्ञान लिया है। मामले की जांच कर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, बच्चे को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। - डॉ. अनुराग अग्रवाल, चिकित्सा अधीक्षक, दून अस्पताल