देहरादून। सूचना का अधिकार किस तरह धोखाधड़ी को रोकने में बड़ा हथियार साबित हो रहा है, यह मामला इसका एक अच्छा उदाहरण कहा जा सकता है। एक महिला की मृत्यु का फर्जी प्रमाणपत्र जारी होने की आशंका में पौड़ी गढ़वाल की एक आवेदनकर्ता ने सूचना अधिकारी से पूछा कि उनके अंतिम संस्कार का प्रमाणपत्र किस अधिकारी ने जारी किया, उसका नाम बताएं। महिला ने यह भी पूछा है कि अंतिम संस्कार में कौन-कौन लोग शामिल हुए, इसकी जानकारी भी दी जाए।
चमोली सैण की रहने वाली कृष्णा देवी ने सूचना के अधिकार के अंतर्गत खंड विकास अधिकारी से यह सूचना मांगी कि एक महिला की मृत्यु का प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए किन-किन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने यह भी पूछा कि उक्त महिला का अंतिम संस्कार कहां हुआ, और उस अंतिम संस्कार में कौन-कौन शामिल हुआ, इसकी जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
आवेदक को इस बात की जानकारी तो मिल गई कि महिला की मौत का प्रमाणपत्र किस अधिकारी ने जारी किया और इस प्रमाणपत्र के लिए किन दस्तावेजों का उपयोग किया गया लेकिन वे यह सूचना नहीं दे सके कि अंतिम संस्कार में कौन-कौन शामिल हुआ। इसके लिए आवेदक ने प्रथम और द्वितीय अपील दाखिल की। सूचना आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान सूचना अधिकारी के इस तर्क को सही पाया कि अंतिम संस्कार में शामिल होने वालों का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता, इसलिए आवेदक को यह सूचना नहीं उपलब्ध कराई जा सकती। हालांकि, आयोग ने आवेदक को यह सुझाव दिया है कि वे उक्त महिला की मौत का जाली प्रमाणपत्र जारी होने की आशंका होने पर उपयुक्त संस्थान में आवेदन कर उचित निर्देश प्राप्त कर सकती हैं।