विवादों के बीच शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य पद पर कथित रूप से आसीन हुए भूमा पीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ ने कहा कि वे सनातन धर्म के व्यापक प्रचार के लिए कार्य करेंगे।
मोबाइल के प्रचलन से भारतीय समाज में विकृति बढ़ रही है। ऐसे में संस्कारों को बढ़ावा देना जरूरी है। पट्टाभिषेक को लेकर उठ रहे विवादों पर कुछ कहने से बचते हुए अच्युतानंद ने कहा कि जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज उनके परम सम्मानित हैं।
रविवार को स्वामी अच्युतानंद तीर्थ अद्भुत मंदिर से भूमा निकेतन पहुंचे। यहां श्रद्धालुओं ने उनसे आशीर्वाद लिया। यहां पत्रकारों से वार्ता में उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति के व्यापक प्रचार प्रसार के लिए काम करेंगे। आज समाज में विकृति बढ़ती जा रही है। मोबाइल और इंटरनेट के प्रचलन ने युवा पीढ़ी को भ्रमित कर दिया है।
आज संस्कारों को बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि संस्कारों में आ रही कमी का ही असर है कि भारत में वृद्ध आश्रम बनाने पड़ रहे हैं, जबकि भारतीय समाज में इनका कोई स्थान नहीं है। भारत में माता-पिता को भगवान माना जाता है। तेजी से बढ़ रही फ्लैट और एकल परिवार की संस्कृति भी समाज के विघटन का कारण है।
उन्होंने कहा कि वे समान नागरिकता देश में लागू करने पर बल देंगे। किसी भी आधार पर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। सभी नागरिक बराबर हैं, इसलिए समान नागरिकता का भाव रखा जाना चाहिए।
पट्टाभिषेक को लेकर उठ रही विवादों पर कुछ भी बोलने से बचते हुए अच्युतानंद तीर्थ ने कहा कि जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज उनके परम सम्मानित हैं। वे उनका सदा सम्मान करते रहेंगे। कुछ लोग जानबूझकर अनावश्यक विवाद करना चाहते है। वे ऐसे लोगों के बारे में कुछ भी नहीं कहेंगे।