पिछले दो माह से उत्तराखंड की बिजली व्यवस्था चौपट होने से इसका प्रतिकूल असर उद्योग-धंधो पर व्यापक रूप से पड़ रहा है।
बिजली कटौती का सबसे अधिक खामियाजा प्रदेश की औद्योगिक इकाईयों को भुगतना पड़ रहा है। इसके चलते औद्योगिक इकाईयों से 25 फीसदी तक उत्पादन कम हो गया है।
इसके कारण उद्योगपतियों ने अपने औद्योगिक इकाईयों का विस्तार रोक दिया है। गर्मी से ही बिजली कटौती शुरू हो गई थी। मुख्यमंत्री की ओर से खुद कटौती का शेड्यूल जारी किया गया था।
तभी से औद्योगिक इकाईयों में कटौती की जा रही है। प्राकृतिक आपदा के बाद से स्थिति और भी खराब हो गई है। रोजाना पूरे प्रदेश में बिजली कटौती की जा रही है। शायद ही ऐसा कोई जिला हो जो, बिजली कटौती से मुक्त हो। इसकी जद में औद्योगिक इकाईयां भी आ रही है।
25 फीसदी गिरा उत्पादनः
आपदा के दौरान प्रदेश में बिजली उत्पादन ठप रहा। उस दौरान 15 घंटे तक की बिजली कटौती की गई, जिससे औद्योगिक इकाईयों का उत्पाद प्रभावित रहा। उद्योगपतियों का कहना है कि बिजली कटौती से 25 फीसदी तक सामानों का उत्पादन गिर गया है।
क्या कहते हैं उद्योगपतिः
'उत्तराखंड में पहले जैसी बिजली की स्थिति नहीं रही। गर्मी हो या बरसात औद्योगिक क्षेत्रों में जबर्दस्त कटौती की जा रही है, जिससे उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है। इसके कारण उद्योगपतियों ने अपने इकाईयों का विस्तार फिलहाल रोक दिया है।'
पंकज गुप्ता, अध्यक्ष इंडस्ट्रीज एसोसिएशन आफ उत्तराखंड
'किस औद्योगिक क्षेत्र में कितनी देर बिजली गायब हो जाए। इसका कोई हिसाब किताब नहीं है। इससे औद्योगिक इकाईयों का बड़े पैमाने पर मजदूरी का नुकसान उठाना पड़ रहा है। साथ ही इकाईयों का उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है।'
महेश शर्मा, महासचिव इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन
क्या कहते हैं अधिकारीः
'केवल आपदा के दौरान औद्योगिक क्षेत्रों में अधिक बिजली कटौती की गई। अब चंद घंटे बिजली कटौती की जा रही है। इससे उद्योगों पर बहुत अधिक असर नहीं पड़ रहा।'
एके जौहरी, प्रबंध निदेशक ऊर्जा निगम