दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र संस्थान के सभागार मेें रविवार को इन्दु कुमार पांडे के काव्य संग्रह दिविजा पर चर्चा हुई। साहित्यकार डाॅ. राम विनय सिंह ने विविध पक्षों पर रचनाकार के विचारों को जाना। दिविजा में 51 कविताओं को संकलित किया गया है।
शोध केंद्र के अध्यक्ष प्रो. बीके जोशी ने कहा कि केंद्र की ओर से समय-समय पर इस तरह के साहित्यिक विमर्श, फिल्म प्रदर्शन, व्याख्यान, गोष्ठी व शास्त्रीय संगीत के आयोजन किए जाते रहते हैं। कहा कि इन्दु कुमार की हर कविता में दर्शन का भाव परिलक्षित होता है। डॉ. राम विनय सिंह ने कहा कि इन्दु कुमार पांडे ने दैनिक जीवन की व्यस्तता में भी कविताओं के कोमल भावों को लंबे समय तक सहेजा है। उनकी कविताओं में युगधर्म, निजी भाव बोध तो कहीं पर सामाजिक संवेदना के साथ ही वैराग्य के दर्शन होते हैं।
इन्दु कुमार पांडे ने कहा उन्होंने शायरी से लिखना शुरू किया और उसके बाद हिंदी कविताओं का लेखन किया। उनकी पहली कविता राधेय थी, जिसमें कर्ण को एक अनोखे चरित्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस दौरान निदेशक एन रविशंकर, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, पूर्व डीजीपी अनिल रतूड़ी, प्रोग्राम एसोसिएट चंद्रशेखर तिवारी, लवनीना मोदी, शादाब अली, राजीव भरतरी, प्रवीन भट्ट, डाॅ. सुधारानी पांडे आदि मौजूद रहे।