लंबे इंतजार के बाद मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने इंदिरा मार्केट रि-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट का काम शुरू कर दिया है। इंदिरा मार्केट के व्यापारियों के साथ समझौता होने के बाद प्राधिकरण की ओर से बृहस्पतिवार को महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत की गई। काम पूरा होने के बाद यहां 480 व्यापारियों को दुकानें आवंटित की जाएंगी। साथ ही 1050 वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था होने से घंटाघर क्षेत्र में जाम की समस्या भी काफी हद तक कम हो जाएगी।
गौरतलब है कि अक्तूबर 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इंदिरा मार्केट रि-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया था। प्रोजेक्ट के तहत इंदिरा मार्केट में राजधानी का सबसे बड़ा शॉपिंग कांप्लेक्स बनाया जाना था। इसमें करीब 500 व्यापारियों को दुकानों का आवंटन करने के साथ ही एक हजार से अधिक वाहनों की क्षमता वाली पार्किंग की व्यवस्था की जानी थी। इस बीच व्यापारियों के विरोध के चलते इंदिरा मार्केट रि-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट का काम पांच साल तक लटका रहा। परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए प्राधिकरण अधिकारियों और व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों के बीच कई दौर की वार्ताएं भी हुईं।
व्यापारियों का एक तबका प्रोजेक्ट के पक्ष में था तो वहीं कई व्यापारी इसका विरोध कर रहे थे। पांच साल तक चली लंबी जद्दोजहद के बाद व्यापारी संगठन इस बात पर राजी हुए कि वे शिफ्ट होने को तैयार हैं। प्राधिकरण उपाध्यक्ष बीके संत ने बताया कि इंदिरा मार्केट रि-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट से संबंधित निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। प्रयास है कि जल्द से जल्द निर्माण कार्यों को पूरा कराया जाए ताकि व्यापारियों को दुकानें आवंटित करने के साथ ही उन्हें रोजगार के अवसर मुहैया कराए जा सकें। प्रोजेक्ट के काम में पांच साल की देरी होने के कारण इसका बजट पहले ही दोगुना हो चुका है। ऐेसे में युद्धस्तर पर कार्य पूरे कराए जाएंगे।
घंटाघर के आसपास जाम की समस्या कम होगी
घंटाघर क्षेत्र में बहुमंजिला पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से वाहन स्वामियों को गाड़ियों को सड़कों पर खड़ा करना पड़ रहा है। इसके चलते लोगों को आवाजाही में तमाम तरह की दिक्कतें आ रही हैं। इंदिरा मार्केट रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत पार्किंग का निर्माण होने के बाद यहां जाम की समस्या से काफी हद तक निजात मिलेगी।
यह है देरी का कारण
प्रोजेक्ट के शिलान्यास के बाद व्यापारियों को शिफ्ट करने के लिए पास में ही अस्थायी दुकानें बनाई गई थीं लेकिन व्यापारी इनमें जाने के लिए तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि दुकानें काफी छोटी हैं और उनमें व्यापार ढंग से नहीं चल पाएगा। शिफ्टिंग के लिए प्राधिकरण की ओर से व्यापारियों को कई बार नोटिस भी भेजे गए थे। बात नहीं बनी तो कुछ दिनों पहले प्राधिकरण के अधिकारियों ने व्यापारियों के साथ बैठक कर शिफ्ट होने का अल्टीमेटम दिया था।