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‘इंदिरा अम्मा’ से सीखें खाने का सदुपयोग

Sat, 15 Oct 2016 01:04 PM IST
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
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indira amma canteen
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खाने का सदुपयोग कैसे करें यह कोई इंदिरा अम्मा कैंटीन से सीखे। कम दरों पर लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के साथ ही देहरादून में संचालित इंदिरा अम्मा कैंटीन में खाना बर्बाद न हो, इसका भी खास ख्याल रखा जाता है।
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इसके लिए चावल बीनते हुए उसमें से निकलने वाली कणंकी (चावल के बहुत छोटे कण) तक का उपयोग किया जाता है। कणंकी से यहां की महिलाएं पापड़ बनाती हैं। इसके अलावा कैंटीन का बचा हुआ खाना फेंकने की बजाय कुष्ठ आश्रम और रैन बसेरों में रहने वालों को दे दिया जाता है।

विश्व खाद्य दिवस पर प्रशासन सभी विभागों के साथ मिलकर तीन दिवसीय जागरुकता अभियान चला रहा है। शुक्रवार को पहले दिन सभी विभागों में खाना बचाने का संकल्प लिया गया। इंदिरा अम्मा कैंटीन की महिलाओं ने भी वहां अपने ग्राहकों को खाना बर्बाद नहीं करने का संकल्प दिलाया।
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साथ ही आश्रमों भी खाना बांटा। घंटाघर स्थित कैंटीन संचालिका पूजा द्विवेदी ने बताया कि खाने की बर्बादी रोकना एक दिन की बात नहीं है। यह हमें अपनी आदत में शुमार करना होगा। यही वजह है कि वह हर दिन इस बात का ध्यान रखती हैं। उन्होंने बताया कि कैंटीन में चावल से निकलने वाली कणंकी से पापड़ बनाए जाते हैं।

किसी दिन ज्यादा आलू उबल जाता है तो बर्बाद करने बजाय उनका भी पापड़ बनाया जाता है। जब कभी खाना बच जाता है तो पास के रैन बसेरे और मजदूरों को खाना बांट दिया जाता है। इसी तरह आईएसबीटी स्थित इंदिरा अम्मा कैंटीन में खाना बर्बाद नहीं होने दिया जाता है।

कैंटीन संचालिका दीपा ने बताया कि कैंटीन में जब भी खाना बचता है तो कुष्ठ आश्रम में बांट दिया जाता है। साथ ही पास के स्कूलों में भी बचा खाना दे दिया जाता है। उन्होंने बताया कि विश्व खाद्य दिवस के मौके पर कैंटीन आने वाले ग्राहकों से भी खाने की बर्बादी रोकने और इस दिशा में दूसरे लोगों को भी जागरूक करने की अपील की गई।

कणंकी से ऐसे बनाएं पापड़
आप भी चावल की कणंकी से पापड़ बना सकते हैं। इसको बीनकर अच्छी तरह धो लें फिर इसको उबाल लें। उबला हुआ हल्का गीला हो तो इसे पीस लें इसमें जीरा मिला लें। इसके बाद पतले-पतले पापड़ बनाएं।

खाने की बर्बादी रोकने का संकल्प 
विश्व खाद्य दिवस के मौके पर विकास भवन में खाने की बर्बादी को रोकने का संकल्प लिया गया। सीडीओ बंशीधर तिवारी के साथ ही सभी अधिकारी, कर्मचारियों ने शपथ ली कि अपनी सोच, मानसिकता, आदतें, व्यवहार एवं जीवनशैली में भी परिवर्तन लाएंगे।

अपने जीवन काल में घर, विद्यालय, होटलों आदि किसी भी स्थान पर जाने अनजाने में भी अन्न की किसी भी रूप में (कच्चा खाना, पक्का खाना) बर्बादी नहीं करेंगे। आसपास के लोगों को भी इसके लिए जागरूक करेंगे। कलेक्ट्रेट में भी डीएम सहित सभी अधिकारियों, कर्मचारियों ने यह शपथ ली।
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